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रोजाना जाम के झाम से जूझ रही नगर की जनता

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मिर्जापुर। यातायात विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की लापरवाही का नतीजा है कि जगह-जगह अतिक्रमण और बेतरतीब वाहनों को पार्क करने से नगर की सड़कें सिकुड़ती चली जा रही हैं। इससे शहर में आएदिन चौतरफा जाम लगता है। यही हालत जिले के कस्बों की भी है। रोज राहगीरों, स्कूली बच्चों और यहां तक कि मरीजों को घंटों जाम में जूझना पड़ता है। नो-इंट्री के समय बड़े वाहनों के नगर की सीमा में प्रवेश से भी समस्या बढ़ रही है। नगर की सड़कों पर वाहनों के बढ़ते दबाव और अतिक्रमण के चलते जाम की समस्या नासूर बनती जा रही है। अक्सर मालवाहक नो-इंट्री में सुविधा शुल्क देकर आसानी से प्रवेश कर जाते हैं, जिसके चलते जाम की समस्या बढ़ रही है। यही नहीं सुबह होते ही दुकानदार भी सड़कों पर अतिक्रमण कर लेते हैं। इसी तरह सुबह 10 -12 बजे के बीच जब मंडलीय चिकित्सालय पर मरीजों का आवागमन होता है, तब पूूरा मार्ग जाम में तब्दील हो जाता है। इसी तरह शिक्षण संस्थानों में बच्चों की छुट्टी होने पर दोपहर में नगर का कोई ऐसा मार्ग नहीं बचता, जिस पर जाम से लोगों को न जूझना पड़े। जाम की समस्या बढ़ने से जहां कर्मचारी समय से दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहीं स्कूली बच्चे भी परेशान हो रहे हैं। तहसील चौराहा, रमईपट्टी तिराहा, टीबी अस्पताल तिराहा, मंडलीय चिकित्सालय मार्ग, गिरधर चौराहा, खजांची का चौराहा, डंकीनगंज चौराहा, तेलियागंज, मुकेरी बाजार, लालडिग्गी, मुसफ्फरगंज मार्ग, इमामबाड़ा, शास्त्री सेतु, त्रिमोहानी, बसनही बाजार, घंटाघर, टटहाई रोड, संगमोहाल, रोडवेज तिराहा, पीलीकोठी मार्ग, महंत शिवाला मार्ग पर जाम लगने से एंबुलेंस में सवार मरीज भी घंटों फंसे रहते हैं। दिन ब दिन समस्या गंभीर होने के बावजूद नगर के चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती नहीं की जा रही। होमगार्ड के चंद जवानों के भरोसे नगर की ट्रैफिक की व्यवस्था छोड़ दी गई है। कुछ चौराहों पर पुलिसकर्मी रहते हैं, जो वसूली में व्यस्त रहते हैं।
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