मिर्जापुर। आयकर व्यापार कर अधिवक्ता संघ की बैठक गुरुवार को तेलियागंज स्थित वाणिज्य कर कार्यालय परिसर में हुई। इसमें जीएसटी कर प्रणाली में व्याप्त खामियों को दूर करने की मांग की गई। इस दौरान मथुरा प्रसाद मैनी ने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए ई वे बिल की अनिवार्यता कम से कम पांच लाख के ऊपर के माल पर की जाए। साथ ही नोटिस प्रक्रिया ईमेल और मैनुअल दोनों विधि से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत में जीएसटी कर प्रणाली तभी सफल होगी, जब 1.5 करोड़ रुपये तक के वार्षिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों को मैनुअली और ऑनलाइन दोनों तरीके से विवरणी दाखिल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जीएसटी कर प्रणाली को सरकार की ओर से धीरे धीरे लागू किया जाना चाहिए था, जिससे व्यापारी जीएसटी के प्रति अभ्यस्त हो सकें। केंद्र सरकार ने जीएसटी को व्यापारियों पर अचानक थोप दिया। ऐसे में अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में शिथिलता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक करोड़ तक के नीचे के व्यापारियों के लिए रजिस्ट्रेशन संशोधन और समाधान की कार्रवाई को छोड़ कर शेष सभी कार्रवाई एवं विवरण दाखिल करने, चालान जमा करने की वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी प्रणाली में करदाताओं, अधिवक्ताओं और एकाउंटेंट को काफी मानसिक पीड़ा हो रही है। उन्होंने कहा कि सर्वर, नेटवर्क और पोर्टल की खराबी के चलते रिटर्न दाखिल में विलंब होता है। इसके चलते विलंब पर अधिकतम 500 रुपये विलंब शुल्क लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी पर संघ की अगली बैठक 20 फरवरी को होगी। इस दौरान विजय कुमार जायसवाल, राम कैलाश आदि मौजूद रहे।