ड्रंमडगंज। विंध्यवासिनी रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही 16 दिवसीय रामलीला के आठवें दिन धुनष यज्ञ तथा परशुराम लक्ष्मण संवाद लीला का मंचन किया गया। मंचन के दौरान जैसे ही राम ने धनुष तोड़ा जनक पुरी में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सीता ने राम के गले में वरमाला डाल कर स्वंयवर पूरा किया।
लीला में धनुष तोड़ने के लिए रावण सहित विभिन्न देशों के राजा पहुंचे थे। शिव जी का धनुष तोड़ने के लिए कई राजाओं ने जोर आजमाया लेकिन कोई उसे हिला न सका। राजा जनक ने कहा लगता है, पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। जिस पर लक्ष्मण क्रोधित हो गए। विश्वामित्र ने उन्हें शांत कराया। भगवान राम ने धनुष को प्रणाम कर उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तभी धनुष टूट जाता है। धनुष टूटते ही जनकपुरी वासियों के रूप में रामलीला देखने आए रामलीला प्रेमियों के जयकारे से क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। धनुष टूटने के बाद परशुराम लक्ष्मण के बीच संवाद हुआ। उसके बाद सीता ने भगवान राम के गले में वरमाला डाला। परशुराम के क्रोध को भगवान श्री राम ने शांत किया। रामलीला मंचन में अजय शुक्ला राम, गोलू मिश्रा लक्ष्मण, नीरज मिश्रा सीता, श्रीराम मिश्रा विश्वामित्र, ओमप्रकाश पांडेय जनक, लालजी परशुराम, ब्रह्मदत्त मिश्र ने व्यास का रोल अदा किया। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष ओमकार केशरी, उपाध्यक्ष अनिल केशरी, कोषाध्यक्ष आशीष, महामंत्री ज्ञान केसरी आदि रहे।
कैकेई ने मांगा राम का बनवास
अहरौरा। श्री बाल रामलीला समिति चौक बाजार के तत्वावधान में चल रही रामलीला के छठवें दिन कैकेयी कोप भवन, राम वन गमनराम केवट मैत्री और पंचवटि निवास के प्रसंग का मंचन किया गया। राजा दशरथ से महारानी कैकेयी ने दो वरदानों के रूप में राम के लिए 14 वर्ष के वनवास और भरत के लिए राजगद्दी की मांग की। राजा दशरथ विलाप करते रह गए। राम, लक्ष्मण और सीता वन को चले गए। कलाकारों ने जीवंत अभिनय किया। इस दौरान अध्यक्ष कुमार आनंद, रवींद्र नाथ, अनिल, कन्हैया, विपिन केशरी, आदित्य, कामेश्वर, गोल्डी, कान्हा, प्रदीप सहित सैकड़ो लीला प्रेमी मौजूद रहे।