विंध्याचल। वामन द्वादसी पर शनिवार को ओझला स्थित वामनवीर मंदिर के वार्षिक उत्सव मनाया गया। वामन भगवान का फूल मालाओं से सुंदर शृंगार किया गया। इस मौके पर लगने वाले दो दिवसीय वामनवीर मेले में श्रद्धालुओं का हूजूम उमड़ पड़ा। गंगा स्नान के बाद दर्शनार्थियों भगवान वामन का दर्शन कर मंगल कामना की। लोगों ने मेले में गृहस्थी के सामानों व बच्चों के लिए खिलौना खरीदे।
वामनवीर मेले में प्रत्येक वर्ष ग्रामीण क्षेत्र से दर्शनाथियों का रेला उमड़ता है। श्रद्धालु ट्रैक्टर, ऑटो, छोटा हाथी आदि वाहनों से मेले में पहुंचे। दर्शन करने के बाद गृहस्थी के सामानों की खरीददारी की। गुड़ की जलेबी, फल, फूल एवं लकड़ी से बनी वस्तुओं की खरीदारी की। पूरा मेला क्षेत्र खचाखच भरा था। मंदिर के पुजारी उदव नारायन मिश्रा ने बताया कि विष्णु के अवतार भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने इसके लिए मना किया था लेकिन राजा बलि भले ही असुरों के राजा थे लेकिन उनमें भक्ति भाव था। बौने रुप में आए भगवान वामन ने अपना स्वरूप बढ़ाकर पहले पग में पूरी धरती दूसरे में आकाश नापने के बाद तीसरा पग उनके सिर पर रख दिया और उन्हें पाताल लोक जाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के वामन अवतार में लघुता में विराटता का भाव समाहित है।
काला घोड़ा खरीदने की परंपरा
मिर्जापुर। मेले से घोड़ा खरीदने की परंपरा है। नगर क्षेत्र के पक्का पोखरा निवासी लक्ष्मीना अपने मां कलुई के साथ प्रत्येक वर्ष लगभग 50 वषों से वामनवीर के मेला में आ रही है। जहां दर्शन के पश्चात वह बच्चों के लिए लकड़ी का बना काला घोड़ा खरीदकर ले जाती हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि घोड़े पर बैठकर ही वामन भगवान गंगा स्नान करने के बाद दर्शन करते थे।