अहरौरा। नगर के कन्हैया लाल के गोला में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन की कथा में कथावाचक आचार्य राजेश्वरी पांड्या शास्त्री ने कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। कहा कि जब जीव का ब्रह्म साक्षात्कार होता है तो उसके सारे भव बंधन खुल जाते हैं। जितने भी अज्ञान के कपाट हैं वो सब हट जाते हैं। सभी काम क्रोध आदि शत्रु घेरे पड़े हैं वो सब सो जाते हैं। जीव वसुदेव की शुद्ध, बुद्ध, मुक्त हो जाता है। आचार्य जी ने कहा कि भक्तजनों का परिश्रम और भगवत्कृपा जब तक ये दोनों पुष्ट ना हो जाएं तब तक भगवान भक्त के बंधन में नहीं आते। भक्त का परिश्रम प्रबल हो जाय और गोविंद की कृपादृष्टि बरस जाय सो ही काम बन जाता है इसीलिए यशोदा मैया भगवान को ऊखल से बांधने में सफल हो गईं। आचार्य जी ने कहा कि भगवान की प्रतिज्ञा है कि जो मुझे मानकर मेरा आश्रय लेकर चलता है उसे मैं भटकने नही देता क्योंकि वो जीव मेरे भरोसे पर है और जो अपने बल पर चले वो भटक सकता है। इस दौरान राजेंद्र पांडेय, कृष्णा तिवारी, अमित शाह, राजेंद्र अग्रहरि, रवीश, कमलेश केसरी, जितेंद्र सहित अन्य कथा प्रेमी उपस्थित रहे।