मिर्जापुर। श्री रामलीला कमेटी बरियाघाट के तत्वावधान में श्री पंचमुखी महादेव मंदिर सत्संग हाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रव प्रसंग सुनकर श्रोता भाव विभोर हो उठे।
कथा वाचक पं. जयप्रकाश पांडेय ने कहा कि पुत्र हो तो ध्रुव जैसा जो अपने विमाता सुरुचि से अपमानित के बाद निश्चय कर लिया कि सिंहासन अथवा पिता की गोद में किस तरह से स्थान पाऊं। कहा विमाता सुरुचि ने कहा कि तुम्हे मेंरे गर्भ से पैदा होना पड़ेगा। पांच वर्ष के ध्रुव गुस्से में दौड़ते हुए अपनी मां के पास पहुंच पीड़ा बताई। माता ने कहा कि हे ध्रुव तुम्हारी विमाता ने ठीक ही कहा, सिंहासन क्या तुम्हे उपर उठकर उस सिंहासन की चिंता करनी चाहिए जिसे आज तक देव, दानव, गन्धर्व, किन्नर, ऋषि मुनी तक नहीं प्राप्त कर सके। भागवत कथा पश्चात मंदिर पुजारी विपिन कुमार ने आरती किया। इस मौके पर अध्यक्ष वृजभूषण सिंह, अक्षैवरनाथ केसरवानी, रविन्द कुमार गुप्ता, कौशल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।