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अदवा बैराज को अंतिम रुप देने में अधिकारियों ने झोंकी ताकत

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हलिया। स्थानीय विकास खंड के मुड़पेली गांव में बाणसागर सिंचाई परियोजना में निर्मित अदवा बैराज का पीएम मोदी के हाथों लोकार्पण 15 जुलाई को होना है। परियोजना से जिले के हलिया, लालगंज सहित इलाहाबाद जिले के किसानों को लाभ मिलना है। इस बहु प्रतीक्षित सिंचाई परियोजना का शुभारंभ किसानों के लिए खुशखबरी है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के पूर्व की तैयारी का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भी 11 जुलाई को अदवा बैराज का निरीक्षण करेंगे।
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बाणसागर जलाशय मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में सोन नदी पर बना है। वर्ष 1978 से शुरू हुई इस बहुमुखी सिंचाई परियोजना पर करीब 3200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस सिंचाई परियोजना से मिर्जापुर तथा इलाहाबाद जिले को मिलाकर कुल एक लाख 50 हजार 132 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित है। मिर्जापुर तथा इलाहाबाद जिले में पानी देने के लिए हलिया ब्लाक के मुड़पेली गांव के पास बैराज बनाया गया है। अदवा बैराज से अदवा जलाशय में पानी दिया जाएगा। उसके बाद ज्वाइंट अदवा सुखरा जलाशय से होकर सुखरा नहर प्रणाली तथा हलिया राजवाहा को पानी मिलेगा । अदवा जलाशय से ही लालगंज ब्लाक स्थित मेजा जलाशय को भी बाणसागर का पानी दिया जाएगा, इसके लिए भी नहर बनकर तैयार है। अदवा जलाशय तथा मेजा जलाशय में बाणसागर से पानी पहुंचना इन जलाशयों से सिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगा । किसानों को उम्मीद है कि अब बाणसागर के पानी से उनके खेत को पानी मिलेगा। उम्मीद है कि अब हलिया ब्लाक के सुखरा नहर सहित हलिया राजवाहा में खरीफ तथा रबी के मौसम की रोपाई, बुआई तथा सिंचाई के लिए समयानुसार पर्याप्त पानी मिलता रहेगा।
कार्यक्रम स्थल हुआ भगवामय : हलिया। बाणसागर सिंचाई परियोजना में बने अदवा बैराज के होने वाले लोकार्पण को लेकर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी ताकत झोंक दी है। यहां का नजारा पूरा भगवामय हो गया है। कार्यक्रम स्थल पर रंगरोगन में भगवा रंग दिखाई पड़ता है। कहीं से कोई कोर कसर न रह जाय, इसके लिए अधिकारियों द्वारा फूंक-फूंक कर कदम रखा जा रहा है। क्षेत्र में रात-दिन अधिकारियों की आवक बनी हुई है। लोकार्पण से पूर्व यहां का जायजा लेने आ रहे सीएम योगी आदित्यनाथ के आगमन से अधिकारी वैसे भी सतर्क हैं।
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परियोजना में आता रहा गतिरोध: हलिया। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए बाण सागर परियोजना को मंजूरी मिली थी। परियोजना की नहर मध्य प्रदेश के शहडोल से निकलकर यूपी के हलिया, लालगंज, इलाहाबाद, मेजा, जरगो, चुनार होते हुए बिहार जा रही है। इस परियोजना का निर्माण 1978 में शुरू हुआ था। उस समय इसकी लागत 1756 करोड़ रुपये निर्धारित थी। इसमें उत्तर प्रदेश में 71 किलोमीटर नहर का निर्माण होना है। नहर निर्माण के लिए तीन कंपनियां आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक कार्य पूरा नहीं हो पाया। बीच-बीच में अड़चन आती रही। वन विभाग के सेंचुरी क्षेत्र नहर खोदाई की अनुमति नहीं मिलने के कारण करीब पांच वर्ष तक नहर का निर्माण कार्य लटका रहा। सु्प्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नहर का निर्माण फिर शुरू किया गया। लेकिन संबंधित अधिकारियों की उदासीनता और मानक के अनुरूप नहर का निर्माण नहीं करने के कारण धीरे-धीरे इसकी लागत बढ़ती गई और 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। सपा सरकार में तत्कालीन सिंचाई मंत्री रहे शिवपाल यादव ने निरीक्षण के दौरान इस परियोजना के तहत नहर निर्माण में लापरवाही पाई थी और दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद भी नहर निर्माण में तेजी नहीं आई। अब जाकर परियोजना पूरी हुई है।
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