कछवां। क्षेत्र के बरैनी गांव में चल रहे साप्ताहिक राम कथा आयोजन के तीसरेदिन वृंदावन से पधारे रम ज्ञान पांडेय ने राम वनगमन पर प्रकाश डाला। उसके बाद केवट व श्रीराम के बीच मनोहरी प्रसंग सुनाया। केवट भोईवंश का था तथा मल्लाह का काम करता था वह प्रभु श्रीराम का अनन्य भक्त था।
भदोही जिले के सीतामणी से आए कमलापति शुक्ल ने बताया कि राम दरबार में जीव जंतु सबका सम्मान किया जाता था। एक दिन एक कुत्ता श्रीराम के दरबार में आया और उसने प्रभु से शिकायत की, उसने कहा राजन कितने दुख की बात है कि जिस राज्य की कीर्ति चहुंओर रामराज्य के रूप में फैली हुई है, वहीं लोग हिंसा और अन्याय का सहारा लेते हैं। उसने कहा कि मै आपके महल के पास गली में लेटा हुआ था, एक साधू आया और उसने मुझे पत्थर मारकर घायल कर दिया। उसने सिर पर लगे घाव से बहते रक्त को दिखाया। उसने कहा कि साधू अभी भी गली में होगा। उसने प्रभु श्री राम से न्याय की गुहार लगाते हुए साधू को दंडित करने का अनुरोध किया। श्रीराम के आदेश पर साधु को दरबार में लाया गया। दरबार में साधू ने कहा यह कुत्ता गली में पूरा मार्ग रोककर लेटा हुआ था, इसे उठाने के लिए मैने कई बार आवाज लगाई लेकिन यह नहीं उठा। मुझे गली के पार जाना था इसलिए मैंने इसे पत्थर मारकर भगा दिया। श्रीराम ने साधू से कहा एक साधू होने के नाते तो तुम्हें किंचित भी हिंसा नहीं करनी चाहिए थी, तुमने गंभीर अपराध किया है, इसके लिए दंड के भागी हो। श्रीराम ने दंड के लिए कुत्ते का विचार जाना तो कुत्ते ने कहा राजन इस नगरी से पचास योजन दूर एक अत्यंत समृद्ध और संपन्न मठ है, जिसके महंत की दो वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। मेरा मानना है कि साधू को मठ का महंत नियुक्त कर दें। श्रीराम व दरबारियों ने ऐसा विचित्र दंड सुनकर हैरानी भरे स्वर में कुत्ते से पूछा कि ऐसा दंड सुनाने का कारण क्या है। कुत्ते ने कहा मै ही दो वर्ष पूर्व उस मठ का महंत था। ऐसा कोई सुख, प्रमाद, या दुर्गुण नहीं है, जो मैंने वहां रहते हुए नहीं भोगा होगा। इसी कारण इस जन्म में मैं कुत्ता बनकर पैदा हुआ हूं। अब शायद आप मेरे दंड का भेद जान गए होंगे। वाराणसी से पधारे भजन गायक राजेंद्र महराज ने ठुमक चलत राम चंद्र जी बाजत पैजनिया भजन पर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर सुरेंद्र प्रसाद उपाध्याय, राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय, कृष्ण मोहन सिंह, सतीष सिंह आदि मौजूद रहे।