मिर्जापुर। जिले में अस्थायी पशु आश्रय स्थल तो खोले जाने का निर्देश जारी कर दिया गया लेकिन नगर में छुट्टा पशुओं को पकड़े जाने का अभियान बंद कर दिया गया। इससे नगर में छुट्टा पशुओं की संख्या और भी बढ़ गई है।
जिले में दर्जन भर पशु आश्रय स्थल खोले जाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से डेढ़ करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया गया। अभी भी अनेक स्थानों पर अस्थायी पशु आश्रय स्थल नहीं खोले जा सके हैं। नगर में दो पशु आश्रय स्थल खोले गए हैं जिनमें एक एएसजे इंटर कालेज के सामने और दूसरा गैबी घाट पर है। पहले एएसजे इंटर कालेज में गाय व गैबी घाट वाले पशु आश्रय स्थल पर सांड़ को रखने की व्यवस्था की गई थी लेकिन एएसजे के सामने वाले पशु आश्रय स्थल में जगह की कमी होने से अब सभी को गैबी घाट वाले पशु आश्रय स्थल में भेजे जाने की व्यवस्था की गई है।
नगर पालिका प्रशासन की ओर से छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा था जिसे बंद कर दिया गया। नगर पालिका का कहना है कि आश्रय स्थल में अब पशु रखने की जगह ही नहीं बची है। इससे अभियान को बंद कर दिया गया है। नागरिकों का कहना है कि पशु पकड़े ही नहीं गए। वहां कैसे पहुंच गए। जो हैं वह पहले के ही है। इसमें भी उचित देखभाल के अभाव में कइयों की मौत भी हो चुकी है। जिला प्रशासन से मांग की गई है कि वे छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाएं ताकि नागरिकों की परेशानी दूर हो।
नगर के पशु आश्रय स्थलों की संख्या में काफी वृद्धि हो गई है, इसलिए इस अभियान को फिलहाल बंद कर दिया गया है। कुछ दिनों के बाद इसे फिर से शुरू किया जाएगा।
- रामजी उपाध्याय, प्रभारी ईओ, नगर पालिका परिषद मिर्जापुर।