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जल निगम के अधिकारी व कर्मचारियों ने मांगों को लेकर दिया धरना

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जलनिगम कर्मचारियों का धरना
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मिर्जापुर। पेयजल और सीवर का कार्य एनजीओ से कराने के आदेश के खिलाफ जल निगम के कर्मचारियों ने बुधवार को फतहां स्थित अधीक्षण अभियंता के कार्यालय पर प्रदर्शन कर धरना दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक भी जिला प्रशासन को सौंपा। इसमें पेंशन की पुरानी व्यवस्था भी लागू करने की मांग की गई थी।
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धरना सभा में इं. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के 17 करोड़ ग्रामीण आबादी में केवल 10 प्रतिशत लोगों को ही पेयजल मिल रहा है। प्रदूषित पानी पीने से लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। प्रदेश के सात करोड़ शहरी आबादी में से 20 प्रतिशत लोगों को ही सीवर ड्रेनेज की सुविधा उपलब्ध हो पाई है। सरकार इन दोनों व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने पर तुली है। शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के हैंडपंप रिबोरिंग का कार्य पंचायतों को दे दिया गया है। प्रमुख सचिव नगर विकास ने नौ दिसंबर 2017 को जल निगम की ओर से कराए जा रहे परंपरागत कार्य अन्य संस्थाओं से कराने का आदेश दिया है। यह प्रदेश की जनता के हित में नहीं है। पेयजल सीवर का कार्य अन्य संस्थाओं या एनजीओ से कराना कहा तक उचित होगा। मीडिया प्रभारी इंजीनियर आरसी मौर्या ने बताया कि पेयजल व सीवर ड्रेनेज की समुचित व्यवस्था प्रदेश की जनता को उपलब्ध कराने के लिए सरकार को जल निगम को सुदृढ़ करना होगा। कहा कि दो माह से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। इससे कर्मचारी परेशान हैं। उन्होंने जल निगम को सरकारी विभाग घोषित और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग की। कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाएंगी तब तक समय समय पर वह लोग धरना देते रहेंगे। इस अवसर पर अधीक्षण अभियंता एआर रस्तोगी, अधिशासी अभियंता एके सिंह, इंजीनियर प्रवीण चौरसिया, विनीत उपाध्याय, इमरान, महंत सिंह, संजय सिंह ने धरने को संबोधित किया।
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