नगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 27 अक्टूबर 2017 को नसबंदी शिविर लगाया गया था। इस शिविर में क्षेत्र की कुल नौ महिलाओं की नसबंदी हुई थी। उन्हीं नौ महिलाओं में से एक महिला के नाम के स्थान पर केन्द्र पर कार्यरत एक स्टाफ नर्स ने अपना नाम येन केन प्रकारेण नसबंदी रजिस्टर में दर्ज करा ली। नसबंदी के बाद प्राप्त होने वाली धनराशि को भी उसने प्राप्त कर लिया।
लगभग आठ माह बाद उसने नसबंदी कराने का प्रमाण पत्र की मांग रजिस्टर्ड पत्र के माध्यम से की। स्टाफ नर्स की ओर से स्वास्थ्य केन्द्र से मांगे गए प्रमाण पत्र की जब जानकारी अन्य स्टाफ को हुई तो स्टाफ नर्स की यह बात स्वास्थ्यकर्मियों में चर्चा का विषय बन गया। प्रभारी चिकित्साधिकारी के संज्ञान में आया और उन्होंने संबंधित लिपिक को प्रमाण पत्र निर्गत करने से तत्काल मना कर दिया और मामले में नसबंदी टीम में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों को आख्या दिये जाने का निर्देश दिया है। प्रभारी चिकित्साधिकारी वीके पंकज से पूछे जाने पर बताया गया कि मामला मेरे संज्ञान में है। नसबंदी टीम द्वारा आख्या देने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि मामले में सत्यता पाई गई तो संबंधित महिला स्वास्थ्य कर्मी व मामले से जुड़े अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।