मिर्जापुर। नगर के कई इलाकों में चाइनीज मंझा धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। पतंग की दुकानों पर खतरनाक बन चुके चाइनीज मंझे को रोक के बावजूद दुकानदार बेचने में लगे हैं, जबकि चाइनीज मंझा पतंग उड़ाने वालों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। इससे कई दर्दनाक घटनाएं घटित हो चुकी हैं। विद्युत पोलों व तारों में चाइनीज मंझे में फंसकर पक्षियों व बंदरों की मौतें हो चुकी हैं। परंपरागत बरेली की बनी मंझे की मांग दिनों दिन कम होती जा रही है। कमाई के चक्कर में पतंग बेचने वाले दुकानदार लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिला प्रशासन आंखें मूंद हादसे का इंतजार कर रहा है।
पतंग उड़ाने का शौक रखने वाले रोक के बावजूद चाइनीज मंझे का प्रयोग कर रहे हैं। नगर के तुलसी का चौराहा, पक्की सरांय, सबरी, भैसहिया टोला आदि इलाकों में दर्जनों दुकानों पर खुले आम चाइनीज मंझे बिक रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि यह सस्ता पड़ता है, इसलिए पतंग उड़ाने वालों में इसकी मांग अधिक है। उन्होंने बताया कि परंपरागत मांझा बरेली से बन कर आता है, जो तागों से बना होता है। इसके विपरीत चाइनीज मांझा प्लास्टिक से बना होता है, जो काफी मजबूत होती है। इसमें फंस कर कई लोगों के हाथ तो कईयों के गले कट चुके हैं। पतंग के शौकीन भी इसके चपेट में आ चुके हैं। कार्रवाई नहीं होने से पतंग बेचने वाले दुकानदार खुले आम मंझे को बेच रहे हैं। मकरसंक्रांति के अवसर पर पतंग उड़ाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन लोग छतों व पर्व पर लगने वाले मेले में जाकर पतंगबाजी का लुत्फ उठाते हैं। सस्ता के चक्कर में पड़ कर लोग अपना व दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं, जबकी बरेली की बना मंझा 120 रुपये में 50 ग्राम मिलता है और चाइनीज मांझा 80 रुपये में 50 ग्राम बिक रहा है। पतंग के शौकीनों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई न करने से बाजार में प्रतिबंधित मंझे बिक रहे हैं। सस्ता के कारण लोग चइनीज मांझे खरीद रहे हैं।