विंध्याचल। सोमवती अमावस्या पर विंध्यधाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भोर से ही कतारबद्ध भक्त होकर मां का दर्शन के लिए खड़े रहे। मंदिर परिसर मे तिल रखने तक की जगह नही बची थी। घाटों पर गंगा स्नान करने वालों का रेला लगा रहा। मंगला आरती के बाद पट खुला तो रात तक दर्शन-पूजन चलता रहा।
मंदिर के आसपास के सभी रास्तों पर मां के भक्त कतार में खड़े होकर मां का जयकारा लगाते रहे। महिलाएं गोद में बच्चों को लेकर लाइन में लगी रहीं। मंदिर परिसर भक्तों से ठसाठस भरा रहा। कुछ भक्तों ने झांकी के रास्ते मां की आरती उतारी तो कुछ ने गर्भ गृह में जाकर मां से मंन्नत मांगी। कतार में खड़े श्रद्घालु आंखें मूंदे भक्ति में लीन रहे, तो झांकी व गर्भ गृह से दर्शन कर बाहर निकलने वाले भक्तों के चेहरे से खिले रहे। भोर से दर्शन पूजा का सिलसिला शुरू होकर देर रात्रि तक चलता रहा। सोमवती आमावस्या के अवसर पर विंध्यधाम के गंगा घाटों पर स्नान करने वालों का तांता लगा रहा। माता के दर्शन के बाद श्रद्घालुओं ने परिसर में विराजमान समस्त देवी देवताओं का भी दर्शन पूजन किया। श्रद्घालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस व विंध्य पंडा समाज लगा रहा।
भक्तों ने किया त्रिकोण भ्रमण
विंध्याचल। सोमवती अमावस्या के मौके पर विंध्यधाम में उमड़े भक्तों ने कालीखोह में आसमान की ओर मुंह खोले मां काली के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के बाद पहाड़ पर विराजमान अष्टभुजा देवी व रामगया घाट में स्थित मां तारा देवी तथा पंचमुखी महादेव के दर्शन पूजन करने के बाद गंगा जल, बेल पत्र, भांग, धतूरा आदि चढ़ा कर दर्शन पूजन किया।