मिर्जापुर। परिषदीय स्कूलों में प्रथम सत्र की परीक्षा हो चुकी है जबकि हर विद्यालय में प्रत्येक विषय की किताबें ही नहीं वितरित की जा सकी हैं। इस तरह की अव्यवस्था के चलते ही स्कूल चले अभियान और जागरूकता रैलियां निकालने के बावजूद लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं भेजना चाहते हैं। पहले अध्यापक मनमाने तरीके से छात्र संख्या दिखाते थे लेकिन अबकी बार हर नामांकन के साथ आधार को जोड़ने की अनिवार्यता के चलते इस बार बच्चों की संख्या में कमी आई है।
परिषदीय विद्यालयों में किताबें, यूनिफार्म, स्कूल बैग आदि मुफ्त दिया जाता है। इसके अलावा दोपहर भोजन का भी प्रबंध है। इसके बावजूद अभिभावक बच्चों का नाम नहीं लिखाना चाहते हैं। इसकी मुख्य वजह है कि कुछ भी समय पर नहीं मिलता है। पिछले साल आधा सत्र बीतने के बाद किताबें मुहैया कराई गई थीं और इस साल पहले सत्र की परीक्षा बीतने के बाद तक यूनिफार्म, किताबों और बैग का वितरण चल रहा है।
उच्च न्यायालय ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को स्कूलों को मूलभूत सुविधा मुुहैया कराने का निर्देश दिया है। मगर अभी विद्यालयों में उनका इंतजाम नहीं हो पाया है। परिषदीय स्कूलों में कुर्सी मेज, बिजली, पंखा, शौचालय के इंतजाम नहीं है। यहां तक कि तमाम विद्यालयों में चहारदीवारी भी नहीं बनाई जा सकी है। जिले में 2210 परिषदीय विद्यालयों में से 1611 प्राइमरी और 599 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। जिला समन्वयक अजय श्रीवास्तव के अनुसार जिले के 2210 स्कूलों में से 950 स्कूलों में अभी तक बिजली ही नहीं पहुंची है तो 1635 स्कूलों में पंखा नहीं लगा है। हांलाकि 599 उच्च प्राथमिक विद्यालयों मेें बच्चों को पंखे की हवा मिल रही है। इसी तरह जिले के 627 स्कूल आज भी चहारदीवारी विहीन हैं, जिससे अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि स्कूूलों में बेहतर शिक्षा के साथ मूलभूत सुविधाएं बेहतर बाने के प्रयास किए जा रहे हैं।