मिर्जापुर। अबोध बच्चों के के प्रथम गुरु माता-पिता होते हैं। माताएं अपने पुत्रों को भगवान की सेवा, बड़ों और गुरुओं को सम्मान देने की प्रेरणा दें। ये बातें श्री रामलीला कमेटी बरियाघाट की ओर से श्री पंचमुखी महादेव मंदिर के सत्संग हाल में शुक्रवार को आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन आचार्य पं. जयप्रकाश पांडेय ने कहीं।
उन्होंने कहा कि पुत्र हो तो गोकर्ण जैसा। माता-पिता और समाज को प्रताड़ित करने वाला धुंधकारी जैसा नहीं होना चाहिए। कहा कि गोकर्ण जितना दयालु व आज्ञाकारी था वहीं धुंधकारी क्रोधी, लोभी व माता-पिता को प्रताड़ित करने वाला था। कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पाप, ताप व संताप नष्ट हो जाते हैं। कहा भगवान कण-कण व जन-जन में व्याप्त है। जिस भाव से जो भगवान को भजता है भगवान उसी भाव से मिलते हैं। इस अवसर पर मंदिर पुजारी विपिन कुमार, अक्षयवरनाथ केसरवानी, अमृत लाल, लक्ष्मन गड़ईया, मनीष सिंह, जयचंद गुप्ता, आशीष गुप्ता, अनुराग जायसवाल, पूनम दुबे, सरिता मौर्य, राधा देेवी, उषा गुप्ता, प्रदीप गुप्ता व कौशल कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।