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विंध्य रेजीडेंसी में शास्त्रीय गायन, वादन व नृत्य का संगम

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विंध्याचल। साधना ललित कला प्रशिक्षण केंद्र एवं श्री विंध्य सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार की शाम विंध्याचल के विंध्य रेजीडेंसी परिसर में संगीतांजलि के तहत संगीत समारोह का आयोजन किया गया। भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में देर रात तक शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य का दौर चलता रहा। कला-साधकों ने अपने गायन, वादन एवं कथक नृत्य से समारोह को यादगार बना दिया।
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विंध्याचल के रेहड़ा चुंगी स्थित होटल विंध्य रेजीडेंसी के सभागार में आयोजित संगीत समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सूर्यकांत मिश्र, अखिलानंद शास्त्री व इं. कुलपाल सिंह मां भगवती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया। संगीताचार्य स्व. पं. शिव जगत मिश्र की 87 वीं पुण्य स्मृति में आयोजित समारोह में संगीत एवं मंच कला संकाय बीएचयूू के संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह ने सितार वादन से समां बांध दिया। इनके साथ तबले पर पं. किशोर मिश्रा ने संगत किया। वाद्य विभाग संगीत एवं मंच कला संकाय बीएचयू के प्रो. प्रवीण उद्घव के तबला के युगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वाराणसी के श्रुतिशील उद्घव ने तबले पर उम्दा युगलबंदी कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। समारोह में कथक नृत्य विभागाध्यक्ष बीएचयू की डा. विधि नागर ने अपने भावपूर्ण कथक नृत्य से दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। समारोह की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक पं. महेश्वरपति त्रिपाठी ने किया तथा संचालन भक्ति किरण शास्त्री ने किया। संगीत समारोह में कजली गायक कुसुम व मनोज कुमार शर्मा ने अपने कजली गायन से सावनी बयार बहाई, वहीं आगेश चंद्र ने गायन से सबका मन मोह लिया। इस दौरान ओम प्रकाश मिश्र, दीनबंधु मिश्र, दिनेश्वरपति त्रिपाठी, सतीश पांडेय, रामेश्वरमपति त्रिपाठी, कामेश्वरपति त्रिपाठी एवं रविशंकर शास्त्री सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।
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