पड़री/चुनार। डगमगपुर स्थित सुरभि शोध संस्थान में कृषि विभाग द्वारा एक दिवसीय जनपद स्तरीय जैविक कृषि गोष्ठी का शुभारंभ कृषि राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप उर्फ धुन्नी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को किसानों का दर्द मालूम है। किसान दिन-रात लगकर फसल उगाता है और फसल बिक्री के दौरान उसे लाभ के नाम पर कुछ नहीं मिल पाता। जिससे वह अपने को ठगा महसूस करता है लेकिन यदि किसान जैविक खेती अपनाए और गाय का गोबर और गौ मूत्र का प्रयोग खेतों में प्रयोग करे तो निश्चित रूप से फसल अच्छी होगी और आर्थिक बोझ भी कम होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये फर्टिलाइजर कंपनियों को किसानों की सब्सिडी का भुगतान करती है। यदि किसान जैविक खेती करना शुरू कर दे तो यह भुगतान सरकार की बचत होगी और इसका लाभ किसी न किसी रूप में किसानों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसान मेला, गोष्ठी और चौपाल गांवों में लगा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य है। खेती के दौरान अधिक से अधिक गाय के गोबर और गौ मूत्र का प्रयोग कर खेती किया जाना। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से 2-3 गुना आय होगी। नई पीढ़ी खेती इसलिए नहीं करना चाहती कि फसल का उसे उचित मूल्य नहीं मिल पाता लेकिन जो पीढ़ी शिक्षित है और वह जैविक खेती कर रहे हैं। फसलों पर दवाओं का छिड़काव न करके गौ मूत्र और फर्टिलाइजर की जगह गाय का गोबर उपयोग करने की बात कही। विषय विशेषज्ञ जटाशंकर सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। संयुक्त निदेशक कृषि आरके यादव, जिला कृषि अधिकारी पवन कुमार प्रजापति, भूमि संरक्षण अधिकारी जीत लाल गुप्ता ने सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान हरिदास पटेल, नरेंद्र मिश्रा, सदाराम पटेल, धर्मदेव उपाध्याय, संचालन फणिंद श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
कृषि राज्यमंत्री गोष्ठी के दौरान किसानों से रूबरू हुए। इस दौरान किसानों ने खेती में आने वाली समस्याओं को विस्तार से बताया। कहा कि जल प्रबंधन न होने से किसान बेहतर तरीके से खेती नहीं कर पाता है। हर वर्ष ही सूखे की मार किसानों को झेलनी पड़ती है। इसलिए जनपद के किसान अच्छी तरह से खेती कर सके, जल प्रबंधन की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए लिए सरकार मृदा परीक्षण का कार्य करा रही है। इसे ब्लॉक वार कराई जाए।