मिर्जापुर। जिले में स्वास्थ्य सेवा दुरुस्त करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार की जा रही कार्रवाई के बाद भी कोई सुधार नहीं नजर आ रहा है। पिछले दिनों जिलाधिकारी और उनकी टीम ने कई अस्पतालों का निरीक्षण कर डाक्टरों, कर्मचारियों को अनुपस्थित पाते हुए उनका वेतन रोका था। इसके बाद भी चिकित्सकों की कार्यशैली नहीं सुधर रही है। जिलाधिकारी ने सोमवार की सुबह पौने नौ बजे मंडलीय चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक समेत 14 डॉक्टर व 55 कर्मचारी ड्यूटी से नदारद मिले। इस पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने इनका एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश सीएमओ को दिया। चिल्ड्रेन एवं अन्य वार्डों में तीन दिनों से भर्ती मरीजों को भोजन देने के लिए उनका नाम रजिस्टर में नहीं दर्ज करने पर स्टाफ नर्स मालती को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया। चेताया कि दोबारा निरीक्षण में नदारद मिले डाक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी पौने नौ बजे मंडलीय चिकित्सालय पहुंचे और सीधे प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के कार्यालय पहुंचे जहां एसआईसी नहीं थे। उन्होंने उपस्थिति पंजिका देखा तो पाया कि एसआईसी, डा. विकास सिंह, डा. नंदलाल, डा. एसके दास, डा. देवर्षि पाठक, डा.जेके गुप्ता, डा. संदीप सिंह, डा. राजेंद्र प्रसाद मेहरा, डा. राहुल सिंह ड्यूटी पर नहीं आए है। स्वास्थ्यकर्मियों में रखपत्तू, अजीत कुमार, रविचंद्र विश्वकर्मा, प्रकाश पांडेय, शिवशंकर यादव, अशोक पांडेय, नंदलाल यादव, रामसजीवन मौर्या, मनोज कुमार, दिनेश गुप्ता, रोहित दूबे, आशुतोष दूबे, सीमा देवी, रामकुमार गुप्ता, विनोद मिश्र, नीतू राय, राजेश कुमार, शालिनी सिंह, सुनीता सिंह, रंजना, सुनीता, वंदना सिंह, ज्योत्सना, दीपक, श्वेता वर्मा, सुधा मिश्र, राहुल सिंह, राज, छोटू यादव, मनोज मिश्रा, सरोज, अनिल कुमार, रविंद्र कुमार, रामआशीष समेत 57 पैरामेडिकल व अन्य स्टाफ भी अनुपस्थित पाए गए। जिलाधिकारी ने सभी का एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया। इमरजेंसी में मौजूद आठ वर्षीय की बच्ची और बेरमऊआ निवासी चंद्रकला से इलाज व दवा के बारे में पूछा। आईसीयू में छह बेड रखे गए थे। बताया गया कि एक सप्ताह बाद आईसीयू चालू होगा।
महिला वार्ड के निरीक्षण के दौरान मरीज लक्ष्मीना देवी निवासी जंगीरोड भदोही और माधुरी पत्नी अनुराग पाठक निवासी सिरसा मेजा ने बाहर की दवा लिखने की शिकायत की। इसी प्रकार वासलीगंज निवासिनी उर्मिला को रेफर कर दिया गया था लेकिन डीएम की फटकार के बाद उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया। एक मरीज ने बताया कि वह शुक्रवार से भर्ती है लेकिन डाक्टर उसे देखने अभी तक नहीं आए है। दवाएं भी बाहर से लिखी गई हैं। महिला वार्ड में भर्ती सविता निवासी बहारो, फुलवारी निवासी सिकरी, सुनीता निवासी मनगढ़ा ने आयरन व खासी का सिरप बाहर से मांगने का आरोप लगाया। जिलाधिकारी ने आपरेशन कक्ष में पाया कि पुराना व गंदी चादर पर मरीज को लिटाया गया है। उन्होंने चादर को बदलवाने का निर्देश दिया। सभी शौचालय गंदे मिले जिनकी सफाई कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने गलियारे में कबाड़ रखा देख नाराजगी जताई। बर्न वार्ड में भी खामियां मिलीं। बताया गया कि कई महीने से एसी नहीं चल रहा है। रैन बसेरा में काफी गंदगी मिली। पोषण पुर्नवास केंद्र में एक बच्ची को साढ़े पांच किलो का पाया गया। जिलाधिकारी ने बच्ची का इलाज कराने और खामियों को दूर करने का निर्देश दिया।
यूनिफार्म में नहीं मिले डाक्टर: ओपीडी में डा. पीएस सिंह बिना यूनिफार्म और नेमप्लेट के मिले। जिलाधिकारी ने उन्हें फटकार लगाते हुए यूनिफार्म में ही अस्पताल आने का निर्देश दिया। निरीक्षण के समय डा. पीएस सिंह ने 11 मरीजों को देखा था। वहीं डा. रामदुलार ने दो मरीज देखा था। इस दौरान जिलाधिकारी ने दवा स्टोर में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए सिटी मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा और तहसीलदार विकास पांडेय को रुक कर सभी दवाओं की मिलान कराने का निर्देश दिया।