मानव शरीर में जिंक की कमी को पीबीडब्लू वन जिंक नामक गेहूं पूरा करेगा। इसके लिए किसानों को खेतों में अलग से जिंक का छिड़काव नहीं करना पड़ेगा। जमालपुर क्षेत्र की उपजाऊ भूमि पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों की मदद से किसानों ने इसकी पैदावार शुरू कर दी है। बीएचयू के प्लांट ब्रीडिंग जेनेटिक विभाग के कृषि वैज्ञानिक डा. एके जोशी व एसके चंद्रा की प्रेरणा से क्षेत्र के किसान सुभाष चंद्र सिंह व रमेश सिंह समेत तमाम किसानों ने भी गेहूं की बुआई शुरू कर दी है। फिलहाल यह रकबा बीस बीघे बताया जा रहा है।
बीएचयू के कृषि वैज्ञानिकों ने मानव शरीर में जिंक की कमी को पूरा करने के लिए गेहूं की एक नई किस्म को ईजाद किया है। जिससे अब गेहूं के आटे से बनी रोटी से मानव शरीर में जिंक की कमी पूरी हो जाएगी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जमालपुर ब्लॉक की उपजाऊ भूमि में जिंक की मात्रा अपेक्षा से कम है। पहले किसानों को खेतों में जिंक की कमी को दूर करने के लिए जिंक का छिड़काव करने की सलाह दी जाती थी। क्षेत्र के शेरवां, चौकियां, भदावल, चरगोडा, चौबेपुर, सरसा, पीडखिर के किसानों ने गेहूं की बुआई की है, जो जिंक युक्त है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी बुआई का सही समय एक नवंबर से 15 नवंबर तक है। इसकी पैदावार प्रति एकड़ 20 से 22 क्विंटल पैदा होती है। गेहूं के फसल की औसत ऊंचाई 100 से 105 सेंटीमीटर तक है। फसल की सिंचाई तीन बार की जाती है। फसल 150 से 160 दिनों में पक कर कटाई योग्य हो जाती है। पीबीडब्लू वन जिंक युक्त गेहूं के आटे की रोटी से मानव का मानसिक व शारीरिक विकास होगा। इस आटे से शरीर में जिंक, प्रोटीन, वसा, तमाम विटामिन सहित पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में सहायक साबित होगी। क्षेत्र के किसान रमेश सिंह, महेन्द्र नाथ सिंह, डा. दूधनाथ यादव, श्रीकांत द्विवेदी, मोती सिंह, सुभाष चंद्र सिंह, संतोष चौबे, शरणशंकर चतुर्वेदी, संतोष दूबे ने क्यारी विधि से गेहूं की बुआई की है।