हलिया ।बहु प्रतीक्षित बाणसागर सिंचाई परियोजना कोरावल क्षेत्र के किसानों के लिए दीपक तले अंधेरा साबित हो रही है, जबकि कोरावल क्षेत्र से होकर ही बाणसागर का पानी अदवा जलाशय में पहुंच रहा है, लेकिन नहर और जलाशय की जद में होते हुए भी कोरावल क्षेत्र का समूचा भूभाग असिंचित है । ऐसे में आजतक कोरावल क्षेत्र के सिंचाई की समस्या का स्थायी समाधान न हो पाने से किसान मायूस हैं ।आजादी के बाद सूखाग्रस्त हलिया विकास खंड में अदवा तथा सुखरा जलाशय का निर्माण तो कराया गया, लेकिन इन दोनों जलाशयों से हलिया ब्लॉक का आंशिक भूभाग ही सिंचित हो पाता है । दरअसल इन दोनों जलाशयों का अधिकांश पानी इलाहाबाद जनपद में चला जाता है । कालांतर में बाणसागर सिचाई परियोजना के अस्तित्व में आने के बाद ऐसा लगा कि हलिया ब्लॉक के बहुतायत असिंचित भू-भाग की सिंचाई के लिए भी पानी मिलने लगेगा, लेकिन बाणसागर नहर से अभी तक सिर्फ अदवा जलाशय में ही पानी पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त होता दिखाई दे रहा है , जबकि बाणसागर नहर की जद में स्थित कोरावल क्षेत्र के चतुर्दिक करीब 40 किलोमीटर भूभाग की सिंचाई के लिए अभी तक कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है । हलिया विकास खंड के दक्षिण पूर्व का हिस्सा कोरावल के नाम से जाना जाता है । दक्षिण में मध्यप्रदेश तथा पूर्व में सोनभद्र जिले की सीमा से लगा यह इलाका पूरी तरह सिंचाई के लिए बरसात पर ही निर्भर है। विडंबना यह है कि आजादी के बाद देश व प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन जल संसाधन होने के बावजूद कोरावल क्षेत्र की सिंचाई की समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका । क्षेत्रीय किसानों ने कोरावल क्षेत्र की सिंचाई के लिए कार्य योजना तैयार कराने की मांग जिलाधिकारी से की है ।