चुनार। आखिर कैसे होगा मुख्यमंत्री का मंशा साकार, जब पांच परगने का राजस्व संबंधी कार्य देख रहा हो पांच की जगह मात्र एक नायब तहसीलदार। बताते चलें कि अभी कुछ माह पूर्व ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर में बड़ी संख्या में 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित राजस्व वादों के निस्तारण न होने पर राजस्व वादों के समीक्षा बैठक के दौरान अपनी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी थी। ज्ञात हो कि चुनार तहसील अंतर्गत कुल 642 राजस्व गांव स्थित है। गांव की संख्या अधिक होने के कारण राजस्व संबंधी विवादों व अन्य मामलों के निस्तारण के लिए वादकारियों एवं फरियादियों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए इन गांवों को पांच परगना में बांटते हुए पांच नायब तहसीलदार का पद सृजित किया गया है। जिससे हर परगना के राजस्व संबंधी विवादों व अन्य राजस्व मामलों का निस्तारण संबंधित परगना के नायब तहसीलदार द्वारा किया जा सके और समय से वादकारियों, फरियादियों को न्याय मिल सकें। चुनार तहसील में हवेली, कृयात, सक्तेशगढ, अहरौरा, भुईली के नाम से परगना बनाए गए हैं और इन परगनों में सर्किल के मुताबिक वादकारी, फरियादी राजस्व संबंधी मामलों के विवादों का निस्तारण कराने के लिए तहसील आते हैं। लेकिन लगभग तीन वर्ष से तहसील के इन पांचों परगनों में नायब तहसीलदार का पद रिक्त चल रहा है। जिसके कारण न्यायालय व अन्य राजस्व संबंधी मामलों का निस्तारण समय से नहीं हो पा रहा है। तहसील में मात्र एक नायब तहसीलदार द्वारा न्यायिक व अन्य राजस्व से संबंधित मामलों को देखा जा रहा है। जबकि अन्य चार नायब तहसीलदार का पद रिक्त पड़ा हुआ है। जिसके कारण तहसील के विभिन्न गांवों से तहसील आकर राजस्व संबंधी न्यायिक व अन्य कार्य को कराने में काश्तकारों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है।