मिर्जापुर, शेरवां। लगातार बारिश के चलते सब्जी की खेती करने वाले किसानों को घाटा उठाना पड़ा है। जून माह में बोई गई सब्जियां नष्ट हो चुकी हैं जबकि जिन सब्जियों की हाल में खेती की गई है, वे भी गलने लगी हैं। इससे किसानों को बीज और खाद की कीमत भी अपने पल्ले से लगानी पड़ी है।
कछवां और सीखड़ इलाके में सब्जियों की खेती अधिक होती है। यहां मिर्च की खेती इन दिनों नर्सरी की हालत में है लेकिन उसकी स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। जिन जिन किसानों ने जाड़े के अगैती सब्जियों की खेती की थी उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। जमालपुर ब्लॉक के सेमरा गांव के किसान, रामवृक्ष मौर्या, कृपाशंकर कुशवाहा, सहिजनी कला खुर्द के किसान लालमन मौर्या,जमालपुर के किसान सोती लाल मौर्या रामआसरे मौर्य, गोपीनाथ कुशवाहा ने बताया कि बरसात के चलते भिंडी, करेला, नेनुआ, लौकी, खीरा, ककरी, कोहड़ाकी खेती बर्बाद हो गई है। भिंडी के बीज 28 सौ रुपये, लौकी के बीज तीन हजार रुपये, धनिया के बीज 180 से 400 रुपये प्रति किलो के दर से डाले गए थे। नर्सरी अंकुर आने से पहले ही सड़ गई है। वही भिंडी, कोहड़ा, करेला, लौकी, खीरा, ककरी, बैगन, तरोई, नेनुआ, की सब्जियां तैयार हो कर बाजार में बिकने जाने वाली थी लेकिन ठीक समय पर भारी बारिश से हुए नुकसान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। विवश किसान सब्जियों की खेती की जमीन पर धान की रोपाई करने के लिए बाध्य हो गए हैं। जमालपुर ब्लॉक के दर्जनों किसानों ने सब्जियों की खेती छोड़कर धान रोपने की तैायरी कर रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी ेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेडा. शैलेंद्र देव दूबे भी मानते हैं कि लगातार बारिश से सब्जी की खेती से नुकसान हुआ है। उनका आकलन है कि फसल लगभग 60 फीसदी तक बरबाद हो गई है। यदि धूप नहीं निकली तो यह नुकसान बढ़ता जाएगा।
इनसेट
रसोई का बजट गड़बड़ाया, अचार काम आया
कछवां। सब्जियों की फसल नष्ट होने की वजह
बाजार में सब्जियों के दामों में एकाएक हुई वृद्धि होने से रसोई घर का बजट गड़बड़ हो गया है। गृहिणी प्रमिला देवी, जै देवी, वंदना सरोजा, झगड़हिया देवी, संजू, सविता ने बताया कि सब्जियां घरेलू बजट को बरबाद कर रही हैं। उधर दूकानदारों का कहना है कि किसान ही नहीं बल्कि आढती और फुटकर विक्रेता भी परेशान हैं। बरसात से पहले लोकल सब्जी सस्ते दामों पर मिल जाती थी और उसमें कमाई ज्यादा होती थी, लेकिन अब लागत ज्यादा और आमदनी कम हो रही है। सब्जी विक्रेता खुर्शीद ने बताया कि जो टमाटर व परवल बरसात से पहले 20 रुपये किलो था आज वो 120 रुपये, भिंडी 30 से 40 रुपये, करेला 50 से 70 रुपये, खीरा 40 से 50 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है, जो आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।