शेरवां। विकास खंड जमालपुर की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से डांवाडोल हो चुकी है, बावजूद इसके विभाग लापरवाह बना हुआ है। रोस्टर अनुसार बिजली की आपूर्ति नहीं होने से जहां बिजली पर आधारित किसी भी प्रकार का काम नहीं हो पा रहा है, वहीं बच्चों के पठन-पाठन पर भी असर पड़ रहा है। बिजली के आने और जाने का समय निर्धारित नहीं होने से जनजीवन बेहाल है। अंधाधुंध बिजली कटौती किए जाने से ग्रामीणों में महकमे के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है।
विद्युत उप केंद्र अहरौरा से संचालित शेरवां फीडर के गांवो मे रोजाना सूर्यास्त होने के बाद बिजली आती है, जो कुछ देर रहने के बाद चली जाती है। सदियों से परंपरा चली आ रही है कि शाम को अंधेरा होने से पूर्व जब सांझ की बाती की जाती है तो दीपक को लक्ष्मी की द्योतक मानकर हांथ जोडते हैं, अब इस परंपरा को बिजली के बल्ब के साथ निभाया जा रहा है, लेकिन विद्युत विभागशाम को जब बिजली देता है तो बल्ब जलते ही बूझ जाते हैं। बिजली की सप्लाई जब भी की जाती है तो लो वोल्टेज रहता है, जिससे कूलर, पंखे आदि नहीं चल पाते हैं। बिजली की बेहिसाब कटौती जहां किसानों की खेती-किसानी प्रभावित हो रही है, वहीं घर में उपयोग की जाने वाली समस्त प्रकार के उपकरण भी शोपीस बनकर रह गए हैं। अहरौरा विद्युत उप केंद्र से संचालित शेरवां फीडर की विद्युत आपूर्ति महिनों बेपटरी हो चुकी है। फीडर से जुड़े शेरवां, बिक्सी, लठिया सहिजनी, मनउर, विसौरा, चौकियां, ककरही, ढेलवासपुर, डूही, ढेबरां, बनौली समेत दर्जनों गांवों मे कसे गए विद्युत पोलों पर तार जर्जर हो चूके है, जिससे आए दिन आपूर्ति ठप रहती है। विधुत उपभोक्ताओं का आरोप है कि सरकार द्वारा जारी किए गए रोस्टर के मुताबिक बिजली नहीं मिल रही है। क्षेत्र के गोपाल सिंह, दुर्गेश द्विवेदी, आलोक श्रीवास्तव, ओमकार यादव, भृगुनाथ सिंह, सुदर्शन सिंह, सुनील कुमार सिंह, संतोष चौबे, बृजमोहन सिंह, सुभाष चंद्र सिंह आदि ने डीएम से प्रदेश सरकार के द्वारा जारी रोस्टर के मुताबिक बिजली आपूर्ति किए जाने की मांग की है।