शेरवां। आज भी कुछ ऐसे शिक्षक हैं जो निष्ठा और समर्पण के साथ बच्चों को पढ़ाकर आदर्श कायम किया है। ऐसे ही शिक्षकों में हैं शेरवां के पूर्व माध्यमिक विद्यालय चकलठिया के शिक्षक पं. राजनाथ उपाध्याय। वे लगातार सोलह वर्षों से बगैर अवकाश लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। छुट्टी के गिन ऊी वे विद्यालय जाकर मां वीणा वादिनी की पूजा-अर्चना करना नहीं भूलते हैं। निर्धारित समय से तीस मिनट पहले विद्यालय पहुंचते हैं।
विकास खंड जमालपुर के रामपुर गांव के मूल निवासी पंडित राजनाथ उपाध्याय उर्फ नीलकंठ में शिक्षा को लेकर जुनून इस कदर है कि 14 अक्तूबर 2008 को मां के निधन की खबर मिलने के बाद भी तत्काल विद्यालय छोड़ कर नहीं गए। अपने बेटे के 22 अप्रैल 2015 को हुए तिलक समारोह के दिन भी छुट्टी नहीं ली। उन्होंने बताया कि मेरी नियुक्ति 28 अप्रैल 1981 में प्राथमिक विद्यालय मझगावां विकास खंड हलिया में सहायक अध्यापक के पद पर हुई। स्थानांतरण 16 जुलाई 1986 को जमालपुर के प्राथमिक विद्यालय भुईली खास प्रथम पर हुआ। 29 जुलाई 2003 को पदोन्नत पाकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय तेतरिया में सेवा की। इसी दौरान 22 अगस्त 2009 में नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय चकलठिया में जब वर्ष 2009 में कार्य भार ग्रहण किया तो विद्यालय में छात्रों की संख्या मात्र 24 थी लेकिन वर्तमान समय में कुल 193 छात्र है। इसमें 60 फीसदी बच्चों की उपस्थिति रोजाना रहती है। गरीब बच्चों पर वेतन का दसवां हिस्सा दान कर देते हैं। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2019 को सेवानिवृत्त होने के बाद वे बच्चों को आजीवन मुफ्त में पढ़ाएंगे। इतना सब के बाद भी राष्ट्रपति पुरस्कार क्यों नहीं मिला? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें ऐसे पुरस्कार की जरूरत नहीं है कि जिसके लिए खुद सिफारिश करनी पड़ती हो।
उधर, ग्राम प्रधान उषा देवी समेत ग्रामीण ओमकार नाथ यादव, विक्रमा यादव, लकी द्विवेदी, दुर्गेश, संतोष चौबे व सहायक अध्यापक प्रभुनाथ सिंह ने बताया कि श्री उपाध्याय का व्यक्तित्व अनुकरणीय है। खंड शिक्षा अधिकारी छत्रपाल सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में श्री उपाध्याय का व्यक्तित्व शिक्षक समाज के लिए प्रेरणादायी है।