मिर्जापुर। आरपीएफ के कारखास द्वारा कई महीने से लगातार लाइसेंसी वेंडरों का किए जा रहे उत्पीड़न से तंग आए स्टाल मालिकों का गुस्सा शनिवार को फूट पड़ा। नाराज स्टाल मालिकों अपनी अपनी दुकान बंद कर वेंडरों के साथ स्टेशन अधीक्षक कार्यालय के बाहर पहुंचे आरपीएफ के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि आरपीएफ में तैनात कारखास समेत कुछ सिपाही लगातार वेंडरों का उत्पीड़न कर रहे हैं। विरोध जताने पर उनको पकड़कर थाने में बंद कर दे रहे है। इससे उनको नुकसान हो रहा है। स्टाल मालिकों ने कहा कि ऐसे भ्रष्ट सिपाहियों और दरोगाओं को तत्काल यहां से हटाया जाए। जिससे वह अपना अंधा चला सके।
स्टाल मालिकों ने कहा कि विगत कई वर्षो से पुराने एग्रीमेंट के आधार पर अपने खान पान एवं स्टाल वेंडरों को ट्रेनों पर महिला बोगी, विकलांग बोगी एवं जनरल बोगी के कोचो तक यात्रियों की सेवा करते आ रहे है। लेकिन इधर कुछ महीनों से आरपीएफ में तैनात कारखास राजेश यादव एवं कुछ अन्य सिपाही व दरोगा लाइसेंसी वेंडरों को पेरशान कर रहे हैं। उन्हें ट्रेनों में खाने पीने की वस्तु नहीं बेचने दे रहे हैं जबकि पुराने एग्रीमेंट में साफ साफ लिखा है कि वह प्लेटफार्म पर टहलकर अपना सामान बेच सकते हैं। जबकि आरपीएफ का सिपाही का कहना है कि वह किसी आदेश को नहीं मानता है। उसके आदेश को सभी को मानना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने वाले वेंडरों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा। स्टाल मालिकों ने इस मामले में डीआरएम समेत अन्य अधिकारियों से शिकायत कर सिपाही के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। मांग करने वालों में राहुल, दशरथ, राजेश गुप्ता, राम प्रसाद, राजनाथ, त्रिभुवन, राजेंद्र, संतोष, नंद किशोर, लालचंद्र, संजय गुप्ता, नासिर खान, जयराम, पप्पू, प्रमोद सोनकर आदि शामिल है।