मिर्जापुर। मंडल के मिर्जापुर और सोनभद्र में पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर खरीदने का अधिकार शासन ने ग्राम पंचायतों को दिया है। इसके लिए टैंकर खरीद में पारदर्शिता बरती जाएगी ताकि लोगोें को नियमित पेयजल आपूर्ति की जा सके। ये बातें केेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्रीे अनुप्रिया पटेल ने अमर उजाला से बातचीत में अपनी उपलब्धियां बताते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति के लिए मिर्जापुर और सोनभद्र के जिन ग्राम पंचायतों में टैंकर से जलापूर्ति की जरूरत है, उसकी सूची वहां के जिलाधिकारी तैयार कराएंगे। सूचीबद्ध ग्राम पंचायतों में टैंकर से जल आपूर्ति की अनुमति दी जाएगी। टैंकर की क्षमता का निर्धारण भी संबंधित जिलाधिकारी करेेंगे। टैंकर में पानी भरने के लिए स्रोत स्तर तक लाने ले जाने की व्यवस्था किराए के ट्रैक्टर से की जाएगी। किराए का भुगतान प्रति किलोमीटर की दर से संबंधित ग्राम पंचायत की ओर से होगा। ग्राम पंचायत की आबादी एवं परिवारों की संख्या एवं 14वें वित्त आयोग में ग्राम पंचायतों को प्राप्त होने वाली धनराशि ध्यान में रखकर टैंकर की संख्या निर्धारित की जाएगी। दोनों जिले की संबंधित ग्राम पंचायतें खुद ही टैंकर खरीदेंगी। इसके लिए ग्राम पंचायत की 14वें वित्त आयोग की कार्ययोजना में संशोधन किया गया है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि उन्होंने मिर्जापुर में जल संकट को लेकर मुख्यमंत्री मुलाकात की थी और पठारी क्षेत्र के प्रत्येक मजरे में सौर ऊर्जा आधारित मिनी पेयजल योजना लगाने का अनुरोध किया था। पेयजल संकट को दूर करने के मुद्दे पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री ने सोमवार को मिर्जापुर के मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को बुलाया था। कहा कि पहले पहले जलनिगम की ओर से टैंकरों से जलापूर्ति में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई जा चुकी है जिसकी शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री से की थी। उन्होंने कहा था कि जल निगम साल में 5.5 लाख रुपए एक ग्राम पंचायत को पानी पिलाने में खर्च करता है, जबकि इतने में ही एक ग्राम पंचायत में जल संकट का स्थायी समाधान हो सकता है। इतनी धनराशि में ही एक सौर ऊर्जा आधारित पेयजल योजना लगायी जा सकती है। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पिछले दिनों ग्राम विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेंद्र सिंह ने जल संकट को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी।