चुनार। नयनागढ़ महोत्सव समिति के तत्वावधान में नगर के श्रीराम उत्सव वाटिका में चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। कथा के पांचवें दिन प्रख्यात कथा वाचक फारूक रामायणी ने कथा प्रेमियों को कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि तुलसी के रामचरित मानस के बिना रामकथा अधूरी है।
उन्होंने कहा कि रामकथा मानव के व्यथा को मिटाने वाला मंत्र है, जीवात्मा परमात्मा को भले ही याद न करे लेकिन परमात्मा सदैव अपने भक्तों को अपने हृदय में रखते हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा तो सर्वत्र व्याप्त हैं, उन्हें ढूंढने की जरूरत नही है। यदि मन पवित्र हो और परमात्मा के प्रति आस्था और श्रद्धा प्रबल है, तो परमात्मा को भक्ति की आंखों से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानव आज महज अपने मंगल के लिए परमात्मा के शरण में शीश झुका रहा है, लेकिन परमात्मा उस व्यक्ति से अति प्रसन्न होते हैं, जो स्वंय की मंगल कामना से पहले दूसरो की मंगल कामना की प्रार्थना करते हैं। रामकथा के पांचवीं निशा कथा पंडाल में नगर सहित तहसील क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से कथा का रसपान करने वाले कथा प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी रही। रामकथा में मेजर कृपाशंकर सिंह, रफीक आलम, संतोष यादव, डा. सत्यवान श्रीवास्तव, सुनील कुमार रस्तोगी, कमलेश्वर कमल, राजू यादव, पारसनाथ श्रीवास्तव, देवी प्रसाद त्रिपाठी, अखिलेश सिंह, डा. डीके अवस्थी सुमन, मनोरमा, अनामिका आदि मौजूद रहे।