विन्ध्याचल। नवरात्र की नवमी के अवसर पर विन्ध्यवासिनी मंदिर के प्रांगण में भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने और भारत को अपने खोये परम वैभव को पुन: प्राप्त कराने के संकल्प और कामना के साथ दक्षिण भारत के संत स्वामी ब्रह्मयोगानन्दा जी ने अपनी पुस्तक ,संपूर्ण भारत परम वैभव भारत, को मां के चरणों में अर्पित किया। मंदिर परिसर में उनके द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया गया।
मंदिर के ऊपर सभागार में वैदिक मंत्रों के बीच विधायक रत्नाकर मिश्र ने इस पुस्तक का विमोचन किया साथ में पंडा समाज अध्यक्ष राजन पाठक, त्रियोगी नारायण मिश्र मिट्ठू ,रमेश मिश्र भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर संत ब्रह्मयोगानन्दा ने कहा कि कोई भी संकल्प और कामना तब तक पूरी नहीं होती जब तक मां त्रिकोण शक्ति मां विन्ध्यवासिनी का आशीर्वाद न प्राप्त हो जाये। किसी भी साधक की साधना मां के आशीर्वाद बिना अधूरी है ।इस अवसर पर रत्नाकर मिश्र ने मां विंध्यवासिनी महात्म लोगों को सुनाया और कहा कि स्वामी जी के संकल्प को मां विंध्यवासिनी अवश्य पूर्ण करेंगी। भारत पुन: मां के आशीर्वाद से परम्बैभवशाली हो और विश्वगुरु बने । इस अवसर पर श्रीधरन ,अभिषेक मिश्र ,रोहित मिश्र ,रामकृष्णा मूर्ति सहित काफी संख्या में स्थानीय लोग सहित दक्षिण भारतीय भक्त मौजूद रहे।