मिर्जापुर। आजादी की सालगिरह जिले के मदरसों में भी धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान न केवल प्रभात फेरी निकाल कर झंडारोहण हुआ बल्कि राष्ट्रगान तरन्नुम के साथ गाया गया। प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी मदरसों में स्वतंत्रता दिवस समारोह की वीडियोग्राफी कराने की कहा था। मदरसा प्रबंधकों ने रिकार्डिंग कराई और भेजा भी। इसके साथ ही उन्होंने शासन से मदरसों के मानकों को पूरा करने की आवाज भी उठाई।
ओलियर घाट स्थित मदरसा अरबिया में जश्न ए आजादी को बच्चों ने बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया। प्रात: साढ़े सात बजे के लगभग मदरसे में पढ़ रहे सैकड़ों बच्चों ने प्रभातफेरी में भाग लिया। प्रभात फेरी ओलियर घाट से घंटाघर, खजांची का चौराहा, बरियाघाट होते हुए मदरसे पर आकर समाप्त हुई। मुख्य अतिथि बसपा नेता मोहम्मद परवेज खान ने झंडारोहण किया। उसके बाद मदरसे के बाहर सभी बच्चों ने कतारबद्घ होकर राष्ट्रगान गाया। प्रबंधक द्वारा सभी बच्चों में मिष्ठान वितरण किया गया। इसके अलावा अदलहाट स्थित मदरसा इस्लामिया में प्रधानाचार्य मौलाना अलाउद्दीन, मदर्सा गौसिया इस्लामिया वेगपुर नरायनपुर में प्रबंधक मो. रफी, मदरसा गौसुल आजम निस्वा हयातनगर में प्रबंधक आजम रहमान, मदरसा रजा ए मुस्तफा में प्रधानाचार्य मोहम्मद अफतार ने एवं नटवां स्थित मदरसा अरबिया सोहैलिया में प्रधानाचार्य मौलाना हाफिज अब्दुल्ला खान ने झंडारोहण किया।
वीडियोग्राफी से नाराजगी
मदरसा अरबिया के प्रधानाचार्य नजम अली ने कहा कि केवल मदरसों से राष्ट्रगान की वीडियोग्राफी मांगना अनुचित और शक से देखने वाली बात है। हम प्रत्येक वर्ष प्रभात फेरी निकलाते हैं, झंडा फहराते हैं और राष्ट्रगान करते हैं। मदरसों के मानकों को पूरा नहीं किया जा रहा है। जनपद में पांच ही सहायता प्राप्त मदरसे हैं। इसमें ओलियर घाट में मदरसा अरबिया, नटवां में मदरसा सुहेलिया, विजयपुर में मदरसा रजा ए मुस्तफा, नरायनपुर में मदरसा इस्लामिया वेगपुर व अदलहाट में मदरसा इस्लामिया गरौड़ी आदि शामिल हैं। मानक के अनुसार तहतानियां (प्राइमरी) व फौकानिया (जूनियर हाईस्कूल) में 52 बच्चों के बाद यदि 31 बच्चे होते हैं तो एक अध्यापक बढ़ाने का नियम हैष उसी तरह आलिया मुंशी मौलवी में 20 बच्चों पर एक अघ्यापक रखने का नियम है, लेकिन किसी भी मदरसे में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि मान्यता व सहायता प्राप्त मदरसे में 15 स्टाफ होने चाहिए लेकिन 1955 से मान्यता प्राप्त मदरसे में आज भी 10 स्टाफ के सहारे पठन-पाठन हो रहा है। अरबी, हिंदी, हिसाब व दीनियात पढ़ाने वाले शिक्षक मुजिबुल इस्लाम ने कहा कि नि:शुल्क पढ़ने वाले बच्चों को बैठने के लिए टाट,पट्टी, भवन की रंगाई पोताई व हास्टल के बच्चों को खाने पीने की व्यवस्था के नाम पर सरकार का कोई सहयोग नहीं मिलता। यहां तक कि तीन वर्ष से बच्चों को छात्रवृत्ति भी नहीं दी गई है। बच्चों की किताबें चार चार महीनों बाद भेजी जाती हैं, जिससे पढ़ाने में काफी परेशानी होती है। मदरसे में 28 वर्षों से कुरान, हदीश, अरबी लिट्रेचर पढ़ाने वाले रामबाग निवासी शिक्षक अब्दुल खालिक ने बताया कि इतने वर्षों से कुछ भी नहीं बदला जो भी व्यवस्था करनी होती है स्वयं ही करना पढ़ता है। वेतन के अतिरिक्त सरकार का कोई सहयोग नही मिलता। राष्ट्रधर्म व धर्म के बारे में उन्होंने कहा कि दोनों अलग अलग विषय हैं। जहां तक धर्म का सवाल है तो हम अल्लाह को सर्वोपरि मानते हैं, लेकिन राष्ट्रगान गाने में कोई परहेज नहीं है।