मिर्जापुर। जिले में बीते एक दशक में जहां जनसंख्या तेजी से बढ़ी है वहीं सुविधाओं के नाम कुछ बढोत्तरी नहीं हुई। इससे लोगों का जीवन और मुश्किल भरा हो गया है। जीवन स्तर में इजाफा नहीं होने के कारण शहरी इलाकों के लोग जहां महानगरों की ओर रुख कर रहे हैं वहीं ग्रामीण इलाकों के लोगों ने जिला मुख्यालय की ओर रुख किया है। इससे शहरों में जनसंख्या का दबाव बढ़ता ही जा रहा है।
जिले की जनसंख्या जहां वर्ष 2001 में 21 लाख 16 हजार थी। इसमें 11 लाख 15 हजार पुरुष और दस लाख से अधिक महिलाएं शामिल थीं। यह आबादी वर्ष 2011 में बढ़ कर 24 लाख 96 हजार तक पहुंच गई। इसमें पुरुष 13 लाख 12 हजार और महिलाएं 11 लाख 84 हजार हो गए। इस दौरान 2.6 के दर से जन्म दर में बढोतरी हुई। इस दौरान यदि सड़कों की चौड़ाई की बात करें तो मात्र विन्ध्याचल औराई मार्ग को ही फोरलेन बनाने का कार्य शुरु हुआ है वह भी इतनी मंथर गति से कि लोग परेशान हो गए हैं। एनएच सात और एनएच 76 के चौड़ीकरण का प्रस्ताव दिया गया है लेकिन इसपर अमल कब शुरु होगा कुछ नहीं कहा जा सकता है। कचहरी से शास्त्री सेतु तक जाने वाला मार्ग इतना संकरा है कि त्योहार और खास दिनों पर इस पर गुजरना टेढी खीर साबित हो रहा है। इन सड़कों पर एक दशक में वाहनों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि इन्हें संभालना दर्जन भर यातायात पुलिसकर्मियों के बस की बात नहीं रह गई है। सरकार बढ़ती जनसंख्या का पेट भरना तो दूर महज 65 फीसदी लोगों को ही अनाज उपलब्ध करा पा रही है। इसमें अत्योदय कार्डधारकों की संख्या 69 हजार 665 है तथा पात्र गृहस्थियों की संख्या भी तीन लाख 44 हजार 425 है। पढ़ाई की सुविधा की जिक्र करें तो प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के स्कूलों की संख्या काफी बढ़ी है लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर नहीं सुधर सका है। ऐसे में जिनकी माली हालत थोड़ी ठीक है ऐसे ग्रामीण अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए शहरी स्कूलों में भेजने लगे हैं। गांवों को खुले में शौच मुक्त करने का अभियान जरूर चलाया गया है लेकिन अभी अधिकांश गांवों में शौचालय नहीं बन सके हैं। जिन गांवों में शौचालय बने भी हैं उनके ग्रामीण जागरुकता के अभाव मेें शौचालयों में उपली रख रहे हैं।