पहाड़ एवं जंगलों की गोद में बसा विंध्य परिक्षेत्र प्रचंड गर्मी से तप रहा है। सूर्य की तीक्ष्ण किरणों ने लोगों के रोम-रोम को भेदकर रख दिया है। इंसानों के साथ ही पशु-पक्षी भी गर्मी से कराह रहे हैं। गंगा की धारा में फैली लंबी रेत की चादर बढ़ती चली जा रही है। अधिकतर नदी-नाले, तालाबों एवं कूप सूख चुके हैं। पारा 44 डिग्री के पार होने से चहुंओर सन्नाटा पसरा रहा।
दोपहर 12 बजते-बजते भगवान भास्कर की तीक्ष्ण किरणें कहर बरपाने लगीं। नौनिहाल बच्चे, बुजुर्ग, बीमार सहित पक्षियाें पर प्रकृति का कहर भारी पड़ रहा है। मई महीने का आखिरी दिन तापमान के मामले में सर्वाधिक गर्म रहा। प्रचंड लू के थपेड़ाें से बचने के लिए लोग घराें में ही कैद रहे।
आसमान से बरसती आग के चलते सड़कों पर पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। अंधाधुंध बिजली कटौती के चलते भी घराें में कैद हुए लोगाें को राहत नहीं मिल पा रही थी। पेड़ाें की बेतहाशा कटौती, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, जल संचयन की कमी मौसम पर भारी पड़ रहा है।
जनपद के ग्रामीण अंचलाें के नदी-नाले, कूपाें और तालाबाें से पानी सूख चुके हैं। वहीं जलस्तर के खिसकने से हैंडपंपों ने भी जवाब दे दिया है। इंसानाें के साथ ही पशु-पक्षी भी भीषण गर्मी से बिलबिला रहे हैं। तपिश भरी लू के चलते व्यक्तिगत काम के साथ ही राजकीय, प्रशासनिक एवं निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। अधिकारी और कर्मचारी दफ्तराें तक ही सिमट कर रह गए हैं। प्रचंड गर्मी के चलते निर्माण एवं विकास कार्य ठप पड़े हैं।