हाईवे पर एक ट्रक ने बाइक सवार युवक को कुचल दिया, जबकि उसका दोस्त घायल हो गया। गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर हाईवे पर जाम लगा दिया। वाहनों में तोड़फोड़ की और आगजनी की कोशिश की। महिलाएं सड़क पर लेट गईं। ग्रामीणों ने सीओ और एसडीएम से हाथापाई कर दी। जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर जाम खुलवाया।
हकीमुद्दीन अली (38) पुत्र मरहूम हनीफ अली मोदीपुरम की द्वारिकापुरी में रहता था। वह अपने दोस्त सुशील कुमार निवासी गांव पबरसा दौराला के साथ मिलकर कारपेंटर का काम करता था। बुधवार सुबह करीब सवा नौ बजे दोनों दोस्त स्प्लेंडर बाइक से शोभापुर स्थित एक ऑफिस में काम करने जा रहे थे। नेशनल हाईवे स्थित खिर्वा चौराहे पर पीछे से आए एक अनियंत्रित ट्रक ने बाइक में टक्कर मार दी।
बाइक पर पीछे बैठा हकीमुद्दीन सड़क के बीच गिर पड़ा, जबकि सुशील किनारे पर गिरा। ट्रक हकीमुद्दीन के शरीर के निचले हिस्से को कुचलता हुआ निकल गया। बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और बुरी तरह क्षत-विक्षत शव को समेटकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। सुशील को कैलाशी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। हकीमुद्दीन की मौत का पता चलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन मौके पर और बाद में पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।
शाम करीब साढ़े पांच बजे पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने शव को पल्हैड़ा चौराहे पर रखकर जाम लगा दिया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण हंगामा करने लगे। आते-जाते वाहनों को रोककर तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश की। महिलाएं सड़क पर लेटकर चिल्लाने लगीं। दोनों ओर से हाईवे बंद हो गया। सूचना पर पल्लवपुरम एसओ तेज सिंह यादव मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। ग्रामीण डीएम और एसएसपी को बुलाने की मांग पर अड़ गए। इस बीच दौराला इंस्पेक्टर परशुराम, कंकरखेड़ा एसओ यादराम यादव, पीएसी और तहसीलदार भी आ गए।
तब भी ग्रामीण टस से मस नहीं हुए। एक घंटे बाद सीओ दौराला डा. अरविंद कुमार और एसडीएम सरधना राकेश कुमार पहुंचे। परिजनों ने 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। इस बीच सीओ और एसडीएम से ग्रामीणों ने नोकझोंक के बाद हाथापाई कर दी। करीब दो घंटे गहमागहमी के बाद सीओ और एसडीएम ने मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 पांच लाख रुपये और 20 हजार रुपये परिवार राहत कोष से देने का आश्वासन दिया। इसके बाद भी ग्रामीण नहीं माने, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। जिससे भगदड़ मच गई। कई लोग गिरकर घायल हो गए। भीड़ को तितर-बितर करके दो घंटे बाद जाम खुलवाया गया। इसके बाद भी पांच किमी लंबे जाम से कराह रहे हाईवे पर यातायात व्यवस्था सुचारु होने में दो घंटे लग गए।
हाईकोर्ट के जज, एंबुलेंस भी फंसी
हाईवे पर लगे जाम में हाईकोर्ट के जज एपी सिंह फंस गए। पल्लवपुरम पुलिस ने उन्हें सोफीपुर मार्ग से मेरठ शहर से होकर दिल्ली रवाना किया। कई एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहीं। खतौली निवासी ममता अपनी बीमार मां ज्ञानवती को मेरठ के अस्पताल से छुट्टी दिलाकर लौट रही थीं। जाम खुलवाने के लिए ममता अकेली भीड़ से भिड़ गईं। एसओ पल्लवपुरम ने ममता की कार को निकलवाया।
नहीं आए जनप्रतिनिधि
ग्रामीणों ने हाईवे पर जमकर उत्पात मचाया। यात्रियों को पीटा और अभद्रता की, लेकिन पुलिस सब बेबस होकर देखती रही। ग्रामीण भी बसपा प्रत्याशी इमरान याकूब और सपा प्रत्याशी अतुल प्रधान को फोन करते रहे, लेकिन दोनों ही नहीं आए। इस दौरान भाजयुमो जिला मंत्री मनिंदर विहान भराला, मंडल मंत्री गौरव चौहान और मंडल महामंत्री विक्रांत ढाका मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को मदद का आश्वासन देकर वे भी लौट गए।
पत्नी और बच्चों का बुरा हाल
परिजनों ने बताया कि हकीमुद्दीन का बड़ा भाई सलीमुद्दीन, दो छोटे भाई अलीमुद्दीन और करीमुद्दीन हैं। हकीमुद्दीन के दो बेटे इंतजार (17) और फैसल (12) हैं। हकीमुद्दीन की पत्नी मौमीना सदमे और गम के कारण बार-बार बेहोश हो रही थी। आसपास की महिलाएं मौमीना को संभालने की कोशिश कर रही थीं। पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था।
चार खूनी चौराहे
नेशनल हाईवे पर यूं तो दौराला से परतापुर तक दर्जनों चौराहे हैं। लेकिन कंकरखेड़ा क्षेत्र के खिर्वा, दायमपुर, जिटौली और डाबका चौराहे काल बन गए हैं। यहां अंडर पास की सुविधा भी नहीं है। क्रॉसिंग के दौरान चारों में से एक न एक चौराहे पर सप्ताह में कोई न कोई दुर्घटना हो जाती है। अब तक दर्जनों मौत इन खूनी चौराहों पर हो चुकी हैं। लेकिन न तो एनएचएआई ने कुछ किया, न ही प्रशासन ने संज्ञान लिया। जबकि अब तक कई परिवार उजड़ चुके हैं। वहीं बाइक सवारों ने हेलमेट नहीं लगाया हुआ था।