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पं. दीनदयाल का संदेश रोजगार दें युवा

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मेरठ। आजादी के बाद देश विकास यात्रा की ओर अग्रसर था। तब पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने युवाओं को स्वरोजगार का संदेश दिया था। वह सदैव यही कहते थे कि स्वरोजगार पर काम करें। युवा रोजगार मांगें नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बनें। हर युवा इस सोच से काम करेे तो भारत कभी बेरोजगारों का देश नहीं रहेगा। उक्त विचार इस्माईल नेशनल महिला पीजी कॉलेज में बुधवार आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में रखे।
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उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित एवं अर्थशास्त्र विभाग की ओर से वर्तमान में युवा शक्ति के निर्माण में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि सीसीएसयू की प्रो वीसी प्रो. वाई विमला ने किया। मुख्य वक्ता आईईए के प्रो. पीके चौबे रहे। विशिष्ट अतिथि सीसीएसयू अर्थशास्त्र विभाग के एचओडी प्रो. दिनेश कुमार रहे। यहां डॉ. ममता सिंह की शोध एवं शिक्षण गांधीवादी दृष्टिकोण पुस्तक एवं डीजे कॉलेज बड़ौत की डॉ. कीर्ति शर्मा की मोंटेरी इकनोमिक्स का विमोचन हुआ।
सेमिनार में मुख्य वक्ता प्रो. पीके चौबे ने कहा कि युवा शक्ति को सही दिशा का चुनाव करने की जरूरत है। जिससे वे स्वयं एवं राष्ट्र का विकास कर सकें। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल ने सदैव स्वरोजगार पर ज़ोर दिया है। युवाओं को रोज़गार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रो. वीपी त्रिपाठी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की युवा शक्ति के जागरण में महती भूमिका रही है। चाहे हम कितनी भी उच्च शिक्षा हासिल कर लें परंतु समाज से विमुख नहीं होना चाािहए। प्रो. एके तोमर ने कहा कि युवाओं को अपनी विचारधारा बनानी होगी। हमें समाज के हर व्यक्ति को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए। प्रो. केएन भट्ट ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तीन प्रमुख बातें सर्वोदय, स्वदेशी एवं ग्राम समाज पर प्रकाश डाला। प्रो. वाई विमला ने कहा कि हमारे महापुरुषों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रो. दिनेश कुमार ने सभी अतिथियों का परिचय दिया। डॉ. बीएस यादव, प्रो. वीपी त्रिपाठी, प्रो. केएन भट्ट, प्रो. एके तोमर ने भी विचार रखे। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नीलिमा गुप्ता व डॉ. ममता सिंह ने अतिथियों को धन्यवाद किया। पैनल डिस्कशन में नेपाल सरकार के सामाजिक विकास मंत्री जीवन समेत डॉ. सीबी सिंह झांसी, डॉ. साहब सिंह मोदीनगर, डॉ. सरजीत सिंह रुड़की आदि ने विचार रखे।
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सेमिनार में दो तकनीकी सत्र हुए। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से आए वक्ताओं ने विचार रखे। वहीं, पीलीभीत से डॉ. अंग्रेज सिंह, आगरा से डॉ. मनोज राठौड़, दिल्ली से डॉ. मंजुल सिंह, लखावटी से डॉ. दुष्यंत सिंह, ननौता से डॉ. गरिमा चौधरी एवं मेरठ से डॉ. दीप्ति कौशिक ने भी संबोधन किया। पहले दिन 15 शोध पत्र पढ़े गए। शोधार्थियों ने युवा वर्ग के लिए पंडित दीनदयाल के विचारों पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. दुष्यंत कुमार सिंह ने किया। सेमिनार का संचालन व संयोजन अर्थशास्त्र विभाग की एचओडी डॉ. ममता सिंह ने किया।
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