फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये तो जंगलराज, झेलना जनता को ही पड़ा 

Tue, 03 Apr 2018 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
मुंह पर रुमाल। हाथों में डंडे। सबको भुगत लेने की सरेआम धमकी देने वाले युवाओं को देखकर शहरवासी सहमे रहे। इन बवालियों ने जिसे चाहा उसे सड़क पर रोककर दुर्व्यवहार किया। जिस गाड़ी में चाहा तोड़फोड़ कर दी। हाइवे पर फंसे लोग हों या फिर स्कूलों से आए इमरजेंसी मैसेज के बाद दौड़ते बदहवास परिजन। सबकी जुबां पर बस यही शब्द थे... ये तो जंगलराज है।
विज्ञापन

सुबह आठ बजे शहर में सब कुछ रूटीन की तरह था। इसी बीच शहर के आउटर इलाकों से युवाओं की टोलियां नारेबाजी करते हुए जगह-जगह इकट्ठा होने लगीं। चेहरा छिपाए इन युवाओं ने तिरंगे के साथ नीले झंडे ले रखे थे। लोगों को लगा कि ये सब अक्सर शहर में होने वाले प्रदर्शनों जैसा ही कुछ होगा। पुलिस-प्रशासनिक अफसरों का भी यही मानना था। लेकिन दस बजते-बजते इन युवकों ने सड़कों पर जाम लगाना शुरू कर दिया। रही-सही कसर पुलिस के सड़कों से गायब होने से पूरी हो गई। आधा घंटे के भीतर शॉप्रिक्स मॉल चौराहा, परतापुर, मवाना रोड, हापुड़ रोड, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, गढ़ रोड से तोड़फोड़ की सूचनाएं आनी शुरू हो गई। कंकरखेड़ा में पुलिस चौकी आग के हवाले करने के साथ जगह-जगह रोडवेज की बसों में तोड़फोड़ की खबरें फैलनी लगीं।
एनएच-58 पर वाहनों के पहिए थम गए। शहर में माहौल खराब होने का शोर मचा तो लोगों ने रिश्तेदारों-परिचितों को फोन करके घरों से बाहर निकलने की मनाही कर दी। स्कूल-कॉलेजों के अलावा सीसीएसयू में भी बवालियों के पहुंचने से भगदड़ मच गई। बवालियों ने यहां झाड़ियों-पेड़ों तक में आग लगा दी। मुख्य परीक्षा होने के कारण छात्र-छात्राएं दहशत में दिखे। मेरठ कॉलेज के बाहर हर कोई खौफजदा था। बाहर से आने वाले सैकड़ों छात्रों की परीक्षा छूट गई। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। जिससे पूछा, वह यही बोला कि ऐसा जंगलराज नहीं देखा। न कहीं लोगोें की मदद करने के लिए पुलिस दिखी न ही कोई एक्शन प्लान नजर आया। वो तो गनीमत रही कि बवालियों ने कुछेक जगहों को ही खासतौर से निशाना बनाया। वरना, वे जहां-जहां जाम लगा रहे थे, वहां भी कुछ कर देते तो कोई रोकने वाला नहीं था। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें