हस्तिनापुर। नवरात्रि के अवसर पर कस्बे के पांडव टीले पर मौजूद प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में दूसरे दिन दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की वैदिक मंत्रों के साथ पूजा-अर्चना की गई। पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शाम तक मंदिर प्रांगण में भजन कीर्तन करते रहे।
मंगलवार को प्रातः काल माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पित करने के बाद ब्रह्मचारिणी मां को पंचामृत और मिठाई का भोग लगाया गया। साथ ही माता को पान, सुपारी, लौंग अर्पित किए गए। फिर देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करके ढोल नगाड़े और शंख के साथ माता की आरती की गई।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। उनके नाम में ही उनकी शक्तियों की महिमा का वर्णन मिलता है। अर्थात कठोर तप और ब्रह्म में लीन रहने के वजह से इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा के इस स्वरुप की पूजा करने से तप, त्याग, संयम, सदाचार आदि में वृद्धि होती है।
आचार्य मुकेश शांडिल्य ने कहा कि मां दुर्गा के इस स्वरूप को अनंत फल देने वाला माना गया है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से ज्ञान बढ़ता है और सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
इस अवसर पर पंडित ज्योति शर्मा, सीमा गुर्जर, पंडित मोहित शर्मा, पंडित विशु शर्मा, पंडित चंद्र प्रकाश शुक्ला, कृष्ण सैनी आदि मौजूद रहे।
प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद