प्राचीन जयंती शक्तिपीठ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
पंडित चंद्रप्रकाश शुक्ला और पंडित रोहित शर्मा ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया। मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने श्रद्धालुओं को मां ब्रह्मचारिणी की कथा सुनाई। उन्होंने मां के स्वरूप की महिमा भी बताई। सुदेश कुमार ने कहा कि मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना का प्रतीक हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
पूजा का महत्व और विधि
मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से भक्तों को धैर्य और आत्मबल मिलता है। इससे कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति भी मिलती है। पूजा में श्रद्धालुओं ने पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित किए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां को शक्कर और मिश्री का भोग लगाना शुभ होता है। मुख्य यजमान मवाना निवासी चौधरी अशोक परिवार सहित पूजा में शामिल हुए। आचार्य मुकेश शांडिल्य, पंडित सुरेश शर्मा, पंडित चेतन शर्मा, पंडित शिवम शर्मा और पंडित मोहित शर्मा भी मौजूद थे।