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परमात्मा की आराधना ही सुखों का साधन : आचार्या श्रुतिकीर्ति

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साकेत में आर्य समाज स्त्री सत्संग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम।
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आर्य स्त्री समाज साकेत के श्रावणी उपाकर्म कार्यक्रम का यज्ञ के साथ समापन
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य स्त्री समाज साकेत द्वारा आयोजित तीन दिवसीय श्रावणी उपाकर्म कार्यक्रम का रविवार को यज्ञ, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन एवं प्रवचनों के साथ समापन हुआ। इसमें सामवेद मंत्रों के साथ विशेष आहुतियां अर्पित की गईं। आचार्या श्रुतिकीर्ति वेदरत्न ने श्रद्धालुओं को वैदिक धर्म के सिद्धांतों से अवगत कराया।
परमात्मा की सच्ची आराधना ही सभी प्रकार के सुखों का मूल साधन है। श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ परमात्मा का स्मरण करने से मनुष्य के जीवन में आत्मबल, शांति, आनंद और सद्गुणों का विकास होता है।
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यज्ञ के यजमान तनु रस्तोगी, पीयूष रस्तोगी, निशा सुधार, प्रवीण सुधार, सुनील देवी, श्यामलाल, मोनू देवी एवं सुशील कुमार रहे।भजन कार्यक्रम में आर्य जगत की भजन उपदेशिका अलका आर्य ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने जीवनभर धर्म का पालन किया, इसलिए धर्म ने हर परिस्थिति में उनकी रक्षा की। उन्होंने सभी से धर्ममय आचरण अपनाकर जीवन को उन्नत बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन रेणुका आर्या ने किया।
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इस अवसर पर स्वामी चंद्र देव, स्वामी अमितेशानंद, श्रीमती प्रमोद रस्तोगी, सविता, किशन लाल कुशवाह, बलराम, नरेंद्र पाल सिंह, राजेश सेठी, यशपाल सिंह आदि रहे।
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