फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: आत्म कल्याण के लिए की जाती है भगवान की साधना

विज्ञापन
विज्ञापन
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 37वें दिन भाव भूषण महाराज ने कहा कि मानव के लिए साधना करना उतना ही जरूरी है, जितना उसके लिए भोजन। क्योंकि साधना से ही आत्मा में हीरे जैसी चमक आती है।
विज्ञापन

विधानाचार्य नीतेश एवं दीपक शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। विकास जैन ने स्वर्ण कलश से अभिषेक किया। शांतिधारा विवेक जैन, अक्षय जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन आकांक्षा जैन, मीना जैन, पायल जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 48 अर्घ्य चढ़ाए गए 77 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
विधान के मध्य गुरुवर भाव भूषण मुनिराज ने कहा कि अगर तेरा कुछ भी है तो वह तेरी आत्मा है। साधना के इस शिखर पर पहुंचने पर भगवान पराये हो जाते हैं। उत्तम त्याग तक करोति क्रिया होती है, पर उसके बाद स्वयं अपने आप क्रिया होती है।
विज्ञापन

विधान का विसर्जन अमित जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन नीतेश जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मौसम त्रिपाल और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन राजा मोदी जैन ने किया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, मनोज जैन, धनपाल जैन, उमेश जैन, दीपक जैन, अतुल जैन, योगेशचंद जैन, मयंक जैन का सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें