योग प्रस्तुत करते जानसठ के जंधेड़ी गांव के विनीत और सौरभ
- फोटो : अमर उजाला
वेदों की योग कला की विदेशों में धूम मची है। युवाओं में करियर के लिए योग का क्रेज बढ़ रहा है। खास पहलू यह है कि ग्रामीण अंचल के युवा योग विद्या में पारंगत होकर चीन, वियतनाम, कनाडा और सऊदी अरब में योगाभ्यास का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
योग ने जानसठ के जंधेड़ी गांव में नई उम्मीदें जगा दी है। युवाओं में योग को करियर बनाने का रुझान पैदा हो गया है। योग प्रशिक्षक विशेष कुमार की बीते एक साल से चीन में योगाभ्यास की कक्षा चल रही है। नंगला मंदौड़ इंटर कॉलेज से 12वीं के बाद उन्होंने योग में मास्टर डिग्री हासिल की। ऋषिकेश में विधिवत योग का प्रशिक्षण लिया। उनके पिता विरेंद्र सिंह और मां अनिता देवी को कभी आशा नहीं थी कि बेटा विदेश में योग सिखाएगा। ऋषिकेश में आए चीन के प्रतिनिधिमंडल ने हठयोग, अष्टांग में विशेष की योग कला देखकर उन्हें अपने देश में प्रशिक्षण के लिए अनुबंधित किया। योग ही उनके जीवन का लक्ष्य है। वर्ष 2015 के बाद चीन में भारत के योग प्रशिक्षकों की डिमांड बढ़ गई है।
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जंधेड़ी के ही विनीत और सौरभ शर्मा सगे भाई हैं। उनकी जिंदगी में योग ही सब कुछ है। बचपन से योग की कलाओं को साधने वाले शर्मा बंधुओं ने शहर के लाला जगदीश प्रसाद इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण की। हल्द्वानी की ओपन यूनिवर्सिटी से दोनों भाई योग में स्नातक कर रहे हैं। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुई 60 वीं नेशनल स्कूल गेम्स में अंडर-17 में विनीत ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। फिलहाल वे ऋषिकेश में यूआईपीएम सेंटर पर योग की ट्रेनिंग ले रहे हैं। पिता विजय शर्मा किसान हैं। विनीत कहते हैं कि अगले माह वह स्टूडेंट वीजा पर वियतनाम जाएंगे, जहां उन्हें विद्यार्थियों को योग का प्रशिक्षण देना है। बीते माह रुड़की आईआईटी में भाई सौरभ के साथ उन्होंने योग प्रदर्शन किया, जिसे इंडोनेशिया और वियतनाम से आई टीम ने सराहा।
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