गंगा किनारे का खाली मैदान जहां खत्म होता जा रहा है, वहीं हस्तिनापुर सेंक्चुरी में 16 वेटलैंड चिह्नित किए गए हैं। गैंगेटिक प्लेन (गंगा का मैदानी क्षेत्र) में यह वेटलैंड स्तनधारियों और पक्षियों के जीवन को बचाने और बेहतर बनाने की उम्मीद जगाते हैं। वन विभाग ने काम शुरू कर दिया है। दो फरवरी को सेंक्चुरी में वर्ल्ड वेटलैंड डे मनाया जाएगा। लोग पक्षी और स्तनधारी जीवों को यहां आकर देख सकेंगे।
हस्तिनापुर सेंक्चुरी में वेटलैंड चिह्नित करने का काम हाल में वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ की टीम ने किया है। गंगा के लंबे दायरे में हस्तिनापुर सेंक्चुरी में ही वेटलैंड मिले हैं। इनकी संख्या 16 है। बिजनौर बैराज से लेकर हस्तिनापुर तक कई अच्छे वेटलैंड मिले हैं। अब तक इन पर किसी की नजर नहीं थी। यहां लोगों की पहुंच भी नहीं है। प्रवासी पक्षी यहां आकर लौट जाते हैं और लोगों को पता भी नहीं चलता। सेंक्चुरी के महत्व को दर्शाने का काम वन विभाग ने शुरू किया है। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक 16 वेटलैंड चिह्नित किए गए हैं। इनकी लोगों तक पहुंच बनाई जाएगी। रास्ता तैयार किया जाएगा। दो फरवरी को वर्ल्ड वेटलैंड डे है। इसे विभाग सेलीब्रेट कर रहा है। सेमिनार और बर्ड वॉचिंग कराई जाएगी। सेंक्चुरी में ही दो दिन का कार्यक्रम होगा। एक दिन सेमिनार और दूसरे दिन फील्ड विजिट होगी। वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ प्रो. हफीफुल्ला खान का कहना है हस्तिनापुर सेंक्चुरी में वेटलैंड का मिलना राष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है। यहां पर पक्षी और स्तनधारी देखे जा सकते हैं। छोटे पक्षियों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। स्तनधारियों में कछुआ और मगरमच्छ हैं। घास और टाट पक्षी और स्तनधारियों के लिए अच्छी है।
ये है वेटलैंड
वेटलैंड की परिभाषा यह है कि वह वॉटर बॉडी जहां पर पानी रुकता हो। पानी और मैदान के मिलन को वेटलैंड कहते हैं। इसे दलदल जमीन भी कह सकते हैं। पीने के लिए पानी और रहने के लिए जमीन दोनों पास-पास मिलने की वजह से वेटलैंड हैबीटेट की श्रेणी में आते हैं।