शास्त्रीनगर की रहने वाली 31 वर्षीय महिला को परिजन झाड़-फूंक करा रहे थे, मगर आराम नहीं हो रहा था। परेशान होकर मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में दिखाया तो पता चला सीजोफ्रेनिया बीमारी है। अब महिला का इलाज चल रहा है। पहले से काफी आराम है।
दिल्ली रोड के रहने वाले 46 साल के व्यक्ति को यह भ्रम हो जाने पर कि कोई उसकी हत्या कर देगा, परिजन उस पर जादू या ऊपरी असर समझ रहे थे। उसके गंडे-ताबीज करा रहे थे। आराम न मिलने पर जिला अस्पताल के मनोरोग ओपीडी में दिखाया तो बीमारी का पता चला और इलाज शुरू हुआ।
ये बरतें सावधानियां
-मरीज को कभी अकेला और खाली न छोड़ें
-मरीज से खुल कर बात करें और उसके विचार जानें
-उसे काम में व्यस्त रखें और नए कार्यों के लिए प्रोत्साहित करें
-उसमें हीन भावना न आने दें
-तनाव दूर करने के लिए योग का सहारा लें
अपने आप में खोये रहना भी है लक्षण
मेडिकल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल ने बताया कि अपने आप में खोये रहना, अपने आप से बातें करना, चेहरे पर भाव न होना, सारा दिन लेटे रहना, ज्यादा कोशिश करने पर उग्र हो जाना, बिना बात हंसना और कई लोग आपस में बात कर रहे हों तो मरीज को लगता है कि उसका मजाक बना रहे हैं, उसके खिलाफ साजिश रच रहे हैं आदि सीजोफ्रेनिया के लक्षण हैं।
युवावस्था में होती है शुरुआत
वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा ने बताया कि अगर माता-पिता, भाई-बहन को यह बीमारी है, तो बच्चों में यह रोग होने की आशंका रहती है। इसकी शुरुआत युवा अवस्था से होती है। जितनी बार बीमारी का अटैक आता है, उतनी ही बार व्यक्तित्व में कमी आती जाती है। हालांकि एक चौथाई मरीज बिल्कुल ठीक हो जाते हैं।