इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित जल नदियों को प्रदूषित कर रहा है। शहर में करीब 126 औद्योगिक इकाइयां हैं, इनका असर भी प्रदूषण पर दिखाई दे रहा है। हिंडन नदी के किनारे किनौनी, छिलौरा, पांचली बुजुर्ग, कलीना, खिवाई, डालमपुर, डालूहेडा, रसूलपुर जाहिद, हर्रा, नाहली, मीरपुर जावेडा आदि गांवों के हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। इन गांवों में करीब एक हजार हैंडपंपों की जांच की गई थी। जिनमें अधिकतर हैंडपंपों का पानी सैंपलिंग में दूषित पाया गया। जिस पर इन हैंडपंपों की हत्थी निकालकर इन पर रेड निशान लगाकर लिख दिया कि इन हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है।
प्रदूषण का वार सेहत पर पड़ रहा भारी
प्रदूषण सेहत पर भी भारी पड़ रहा है। बीमारियों का कारण बन रहा है। वायु प्रदूषण के लिए कार्बन मोनोक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड आदि जिम्मेदार होते हैं। ऐसे प्रदूषण से गंभीर बीमारियां हो रही हैं। मसलन, लोगों को वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों की बीमारी हो रही हैं, दिल के दौरे पड़ रहे हैं और डायबिटीज, अस्थमा व अल्जाइमर जैसे मर्ज हो रहे हैं। सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर का कहना है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा अस्थमा का खतरा होता है। जो लोग पहले से ही अस्थमा से पीड़ित हैं, उनके लिए जहरीली हवा में सांस लेना बेहद खतरनाक है। इसके कारण सांस की नली में सूजन आ जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। बढ़ते प्रदूषण से नाक, गले और आंखों की एलर्जी होने की आशंका रहती है। इससे छाती व गले में कंजेशन भी हो सकता है।
लगातार बढ़ रहा आरएसपीएम
वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। शहर के चौराहों की बात करें तो बेगमपुल पर वर्ष 2013 में आरएसपीएम 140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2019 में बढ़कर 192.1 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पहुंच चुका है। केसरगंज में यह आंकड़ा 118.9 के मुकाबले 150.1 पहुंच चुका है। जबकि इसका मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। हवा में घुलकर सांस के जरिये शरीर में पहुंचने वाले ये महीन कण गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
होती हैं बीमारियां
फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही कहते हैं कि हवा के प्रदूषण और खास तौर से पार्टिकुलेट मैटर को सांस के साथ खींचने से पेट की कई बीमारियां होने का अंदेशा होता है। प्रदूषित हवा में सांस लेने से खांसी, जुकाम, आखों में जलन, फेफड़े इंफेक्शन, सांस की बीमारी, त्वचा संबंधी परेशानियां, हृदय रोग और बालों का झड़ना आदि समस्याएं हो सकती हैं।
सीएनजी वाहन जरूरी
शहर में वाहनों की संख्या बढ़ रही है। प्रदूषण रोकने के लिए सीएनजी वाहनों का प्रयोग बहुत जरूरी है। औद्योगिक इकाईयों में मॉनीटरिंग सिस्टम लगने के बाद प्रदूषण पर भी नजर रखी जा रही है। प्रदूषण से निपटने के लिए जागरूक होना जरूरी है।
- आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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