अमर उजाला ने ही 27 मई के अंक में सबसे पहले सैन्य अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के मंजूरी मिलने की खबर को प्रकाशित किया था। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मारामारी के बीच सैन्य अस्पताल को भी गैस नहीं मिल सकी थी।
बाद में प्रशासन की तरफ से काफी प्रयास के बावजूद सेना को ऑक्सीजन दिलाई गई। सैन्य अस्पताल में भी काफी संख्या में कोविड संक्रमित मरीज थे।
इन हालात के लिए प्लांट की कवायद शुरू हुई। इस प्लांट की जिम्मेदारी एनएचएआई मेरठ के परियोजना निदेशक डीके चतुर्वेदी को दी गई हैं। प्लांट का फाउंडेशन लगने के बाद डीआरडीओ को सूचित कर आगे की प्रक्रिया पूरी करा दी जाएगी। इसे जून में शुरू कराने का लक्ष्य तय किया गया है।
हमारी तरफ से कार्य शुरू कर दिया गया है। डीआरडीओ को प्लांट लगाना है। हम उस स्थल को तैयार कर रहे हैं, जहां प्लांट लगना है। हम इसे 15 जून तक लगा देंगे। इसके बाद लगभग दस दिन लगेंगे। डीआरडीओ 25 जून तक इसे लगा देगा - डीके चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई मेरठ।