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मेरठ महायोजना की उड़ी धज्जियां, सपनों में सिमटे बड़े प्रोजेक्ट, ये था मास्टर प्लान

Fri, 26 Apr 2019 11:47 AM IST
कपिल kapil अमित मुदगल, अमर उजाला, मेरठ
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आउटर रिंग रोड और इनर रिंग रोड - फोटो : अमर उजाला
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महानगर के विकास के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान यानी मेरठ महायोजना 2021 को पूरा होने में मात्र दो साल का समय रह गया है। लेकिन विडंबना देखिए कि यहां विकास अभी सपना ही है। बड़े प्रोजेक्टों पर काम ही नहीं हो पाया। उधर, अब नए मास्टर प्लान 2031 पर काम करने के लिए मशक्कत शुरू कर दी गई है।

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दूसरा चरण भी पूरा होने को
मेरठ महायोजना 2021 वर्ष 2004 में बनी थी। दरअसल इस पर साल 2004 से ही काम होना शुरू हो गया। लेकिन देरी होने के कारण इसका नोटिफिकेशन वर्ष 2006 में हुआ। दो चरणों में इस योजना के शहर के विकास का मसौदा तैयार किया गया। पहला चरण वर्ष 2004 से 2011 तक और दूसरा चरण वर्ष 2012 से 2021 तक तक है।

अधिकारियों की शह पर धड़ाम हुई यह योजना
मेरठ महायोजना अधिकारियों की शहर पर धड़ाम हुई। मनमर्जी से नक्शे पास किए गए। जिन मार्गों को चौड़ा करना था, उन पर कम चौड़ाई में ही नक्शे पास कर दिए गए। शताब्दीनगर से हवाई पट्टी को जोड़ने वाली रोड के बीच में अवैध कालोनी डेवलेप हो गई। ग्रीन बेल्ट पर कब्जे हो गए। केवल एमडीए और आवास विकास ही नहीं बल्कि, सिंचाई, वन, पीडब्लूडी आदि विभागों ने भी शह दी और शहर का अनियोजित विकास होता गया।
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इन प्रस्तावों पर होना था काम
मास्टर प्लान के ले आउट में गहरे रंग में जिस मार्ग को प्रतिबिंबित किया गया है वह आउटर रिंग रोड है। योजना थी कि शहर की तरफ प्रवेश करने वाले सभी मुख्य मार्गों को शहर के बाहर ही जोड़ने के लिए मेरठ में 70 किमी की आउटर रिंग रोड बनेगी। 

शहर के भीतर 34 किमी लंबी इनर रिंग रोड को भविष्य में शहर की लाइफ लाइन कहा जा रहा था। लेकिन इस पर काम ही नहीं हुआ। योजनाओं में जरूर कुछ हिस्सों में यह सड़क बन गई। लेकिन यह प्रस्ताव पूरा ही नहीं हो पाया। विभागों के बीच ही प्रस्ताव पिसकर रह गया।

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महायोजना का अहम प्रस्ताव था नए बस अड्डे बनाना और पुराने बस अड्डों को शिफ्ट करना। यह हो ही नहीं पाया। जबकि बस अड्डों की वजह से यातायात व्यवस्था प्रभावित है। सेटेलाइट बस अड्डे का प्रस्ताव भी गिर गया और उसकी जमीन पर भूखंड आवंटित कर दिए।

महायोजना में उद्योगों के लिए भी प्लान था। कहा था कि शहर से डेयरियों को बाहर किया जाएगा। लेकिन डेयरी बाहर हो ही नहीं पाई। संचालकों ने सस्ती दर पर जमीन मांगी। लेकिन जमीन नहीं दी गई। कैटल कालोनी के लिए एमडीए सीलिंग की जमीन ढूंढ रहा है। 

शहर के बीचों बीच दिल्ली रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर है जिसके कारण दिल्ली रोड पर जाम रहता है। मास्टर प्लान में न्यू टीपी नगर का प्रस्ताव था। पांचली में इसके लिए जमीन आरक्षित की गई। लेकिन प्रस्ताव पूरा नहीं हो पाया। यहां तक कि एमडीए ने इसके लिए एडीएम भू अध्याप्ति के यहां जमा दस करोड़ रुपया भी वापस ले लिया।

इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि पिछले आठ साल से जुर्रानपुर रेलवे फाटक के पास फ्लाईओवर हवा में लटका है और उसे रोड बनाकर जोड़ा नहीं जा सका है। यह प्रोजेक्ट मेरठ महायोजना में शुमार किया गया था।

देखेंगे कैसे बनेगी बात 
इनर रिंग रोड जैसे प्रस्ताव तो शहर के लिए बेहद जरूरी हैं। मैं खुद मास्टर प्लान के ऐसे प्रस्तावों को लेकर गंभीर हूं। अन्य विभागों से भी बात की जा रही है कि इन प्रस्तावों पर कैसे बात बने। - राजेश कुमार पांडेय, वीसी एमडीए

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