तेजी से घटते हीमोग्लोबिन और सेहत की अनदेखी के कारण महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ रही हैं। प्रदेशभर में हर साल एक हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाएं काल के गाल में समा जाती हैं। हेल्थ मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले एक साल में 1627 गर्भवती महिलाओं की मौत डिलीवरी केदौरान हुई है। मृत्युदर में मेरठ का प्रदेश में 24वां स्थान है, यहां 23 मौत हुई हैं। अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक प्रदेश में 36 लाख दो हजार 748 महिलाओं की डिलीवरी हुई थी, जबकि मेरठ में 31635 डिलीवरी हुईं। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की स्तर बढ़ाने के लिए 90 दिन के लिए 180 आयरन की टेबलेट्स दी जाती हैं। दरअसल, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन का स्तर 5 से कम रह जाता है, जबकि महिलाओं में 10 से 12 का स्तर होना चाहिए। महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक (एसआईसी) डॉ. मंजू मलिक ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को काफी एहतियात बरतने की जरूरत होती है। लापरवाही की वजह से वह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ जाती हैं।
यह है हाई रिस्क प्रेग्नेंसी
अगर किसी गर्भवती महिला को खून की कमी है। ब्लड प्रेशर की समस्या है या वह डायबिटिक (मधुमेह) से पीड़ित है, इसके अलावा पूर्व में ऑपरेशन से डिलीवरी हो चुकी है तो ऐसी महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की श्रेणी में रखा जाता है।
इनको ज्यादा खतरा
मोटापे की शिकार महिलाओं को
जो खून की कमी से ग्रस्त हो
जिनका एक से अधिक बार गर्भपात हो चुका हो
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, टीबी, पीलिया आदि रोग से ग्रस्त
ऐसे करें गर्भवती महिलाएं बचाव
डॉक्टर की देखरेख में नियमित टेस्ट कराते रहना चाहिए।
साग, पालक और फलों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।
आलस छोड़कर एक्टिव बने रहना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह से हल्के-फुल्के व्यायाम करते रहना चाहिए।