अग्रसर नारी सम्मान समारोह में शामिल महिलाएं
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365 दिन होता है महिला दिवस: डॉ. शल्या राज
सुभारती विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा.शल्या राज ने कहा कि महिलाओं को शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। आज 21वीं सदी महिलाओं की सदी है। शिक्षित एवं जागरूक महिलाएं परिवार चलाने से लेकर फाइटर प्लेन चलाने का साहसी कार्य करने के साथ देश का नेतृत्व भी कर रही हैं।
हमारे देश में महिला प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सांसद और आजादी के आंदोलन का नेतृत्व करके ये साबित कर चुकी हैं कि समाज में महिलाएं हर मैदान में आगे हैं। उन्होंने कहा कि सभी महिलाएं आत्मविश्वास से कार्य करें, महिलाओं को आगे लाने में पुरुषों को पहल करनी होगी। जब कोई पीठ थपथपाता है तो और अच्छा करने का मन करता है। 8 मार्च को ही नहीं, 365 दिन महिला दिवस होता है। महिला तो जग जननी है। औरत नहीं होती तो जग ही नहीं होता।
भारत फिर सोने की चिड़िया बनेगा: जागृति
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आईएएस जागृति अवस्थी ने कहा कि जिन विकसित देशों को हम देखते हैं, उनमें एक बात कॉमन है कि वहां की नारियां सशक्त हैं। शिक्षा और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना दोनों सश्क्तीकरण के लिए जरूरी हैं। जिस देश में आधी जनसंख्या सशक्त नहीं है, वो देश सशक्त नहीं हो सकता। कार्यक्रम में सम्मानित होने वाली महिलाएं दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं।
बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने बड़े उद्योग स्थापित किए हैं और बहुत सी महिलाएं ऊंचाईयों को पर पहुंचने के लिए प्रयासरत हैं। उनकी मदद करनी चाहिए। भारत फिर से सोने की चिड़िया बनेगा, जिसके दोनों पंख सशक्त होंगे। (जागृति अवस्थी सन् 2020 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा में द्वितीय रैंक हासिल की थी।)
1. प्रोफेसर अलका चौधरी : मेरठ कॉलेज की पहली महिला चीफ प्रोक्टर रहीं। वर्तमान में कनोहरलाल गर्ल्स डिग्री कॉलेज में प्राचार्य हैं।
2. प्रोफेसर अनीता राठी : इस्माईल गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्राचार्य हैं। इससे पूर्व वह आरजी कॉलेज के प्रोफेसर रहीं।
3. विधि चौधरी: गोला फेंक में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। गुवाहटी में आयोजित जूनियर एथलेटिक चैंपियनशिप 2022 में गोला फेंक स्पर्धा में राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता।
4. नेहा कश्यप : रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित वुशू खिलाड़ी हैं।
5. प्रोफेसर डॉ. सुधा रानी सिंह : शहीद मंगल पांडेय गर्ल्स डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर हैं। डी लिट की उपाधि ली है। चार पुस्तकें लिखी हैं। विभिन्न क्षेत्रों में 43 पुरस्कार मिल चुके हैं।
6. डा. कानन त्यागी : स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। मानसिक रूप से कमजोर और बीमार लोगों के लिए कार्य करती हैं। उनके इलाज, खाने और रहने व्यवस्था भी करती हैं।
7. डॉ. योगिता करवाल : जिला महिला चिकित्सालय में सीनियर डॉक्टर हैं। जिलाधिकारी द्वारा एक्सीलेंस सर्विस अवार्ड मिल चुका है।
8. डॉ. अनीता राणा : बाल विवाह रोकने और निराश्रित बच्चों को चाइल्ड हेल्प लाइन के जरिये आश्रय दिलाने का कार्य कर रही हैं।
9. अंजू पांडेय : बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए लोगों में जागरूकता फैला रही हैं।
10. पायल जैन : वर्धमान चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ जुड़कर शहर में स्वास्थ्य शिविर लगा रही हैं। अब तक 400 से अधिक स्वास्थ्य शिविर लगा चुकी हैं।
11. राधिका गौतम : कई फिल्मों और टीवी सीरियलों में काम कर चुकी हैं।
12. डॉ. भावना ग्रोवर : सहित्य और कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड प्राप्त कर चुकी हैं।
13. आचार्य रश्मि आर्य : श्रीमद् दयानंद उत्कर्ष आर्य कन्या गुरुकुल नारंगपुर की प्रबंध निदेशक हैं। शिक्षा के साथ-साथ गुरुकुल में लड़कियों को दक्ष कर रही हैं।
14. गुलशन सैफी : मां जीवनदायिनी चिकित्सालय की चेयरमैन हैं। 13 साल से कन्या गुरुकुल में लड़कियों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं।
15. लेफ्टिनेंट प्रोफेसर डॉ. लता कुमार : शहीद मंगल पांडेय गर्ल्स डिग्री कॉलेज में प्रोफसर हैं। विभिन्न तरह के शोध किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड प्राप्त कर चुकी हैं।
16. जैनब राजपूत : रानी लक्ष्मीबाई अवार्डी और बेटियों को शिक्षा दिलाने में अग्रसर निभा रही हैं। कैलाश सत्यार्थी पुरस्कार मिल चुका है।
17. डॉ.अर्चना मित्तल : पेशे से चिकित्सक हैं। चिकित्सा के साथ-साथ गरीब बच्चों को भी पढ़ाती हैं।