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#KabTakNirbhaya: हैदराबाद की वारदात पर बोलीं महिलाएं- दरिंदों को मिले फांसी की सजा

Mon, 02 Dec 2019 09:57 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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अपने विचार रखती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली में निर्भया प्रकरण के बाद हैदराबाद की वारदात से महिलाएं हैरान हैं। महिलाओं का कहना है कि सख्त कानून से ही नासूर बनती जा रही इस समस्या से निजात मिल सकेगी। बेटी को बात-बात पर टोकने वाले अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वह अपने बेटों की भी निगरानी करें। उनसे सवाल पूछें और कुछ भी गलत पाने पर डांटें। घरों से ही आचरण का दोगलापन खत्म करना होगा। सोशल मीडिया के इस नए दौर में अब मां-बाप की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। समाज को हैदराबाद जैसी वारदात से बचाने के लिए सख्त कानून और जल्द सजा का प्रावधान जरूरी है। अमर उजाला ने राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बागपत में संवाद कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं की राय जानी।

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एक साथ मिलकर लड़ें समाज
गृहणी गुल बानो ने कहा कि इस तरह की घिनौली हरकत करने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। सर्व समाज को एक साथ मिलकर यह साझा लड़ाई लड़नी होगी। यह जरूरी है कि सख्त कानून बनें।

घर से निकलते ही घूरती हैं निगाहें
समाजसेवी डॉ. शालिनी राकेश ने कहा कि महिलाएं अगर आज घर से निकलती हैं, तो उन्हें कुछ निगाहें घूरना शुरू कर देती हैं। नीयत के इस खोट को सख्त कानून और संस्कार दोनों को मिलाकर दूर किया जा सकता है। गलत कार्य करने वाले को कानून से सख्त और त्वरित सजा दी जानी चाहिए। अभिभावक बच्चों को बेहतर संस्कार दें।

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बच्चों को मोबाइल से बाहर निकालें
सामाजिक कार्यकर्ता राधा चौहान ने कहा कि बच्चे आउटडोर खेल भूल गए हैं, अब सिर्फ मोबाइल गेम में ही गुम रहते हैं। मोबाइल से गलत संस्कार मिल रहे हैं। अब माता-पिता और परिवार की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं। बच्चों के साथ बात करें, उनसे दोस्ताना व्यवहार रखें और अच्छे-बुरे का अहसास कराएं।

स्वस्थ मानसिकता से सुधरेगा समाज
शिक्षिका नम्रता यादव ने कहा कि समाज स्वस्थ मानसिकता से सुधरेगा। ऐसी घिनौनी हरकत करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। लेकिन भविष्य की पीढ़ियों और समाज के लिए स्वस्थ मानसिकता वाले बच्चे तैयार करने होंगे। इसके लिए माता-पिता का जुड़ाव बच्चों से बेहद जरूरी है। जरा सी चूक से गड़बड़ी हो सकती है।

इंसानियत की लड़ाई लड़नी होगी
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजना शर्मा का कहना है कि अब इंसानियत की लड़ाई लड़नी होगी। बेटों पर मां-बाप नजर नहीं रखते। बेटों के मन में डर घर से पैदा होना चाहिए। घर का संस्कार बदलना और बनाना होगा। बेटों को सीख दें कि अपनी बहन की तरह ही अन्य महिलाओं को भी इज्जत दें।

सख्त बनें कानून और तेजी से मिले न्याय
एडवोकेट सोनिया चौधरी ने कहा कि समाज में आज छोटी-छोटी बच्चियां सुरक्षित नहीं है। मां-बाप अपनी बेटियों को घर से बाहर भेजने से डरने लगे हैं। सख्त कानून और तेजी से न्याय दिलाकर ही ऐसे प्रकरणों पर रोक लगाई जा सकती है। बेटियों को और अधिक हौसला दिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि दरिंदों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

घिनौने लोगों का किया जाए बहिष्कार
अग्रवाल मंडी टटीरी की प्रियंका आर्य ने कहा कि नारी गरिमा को अक्षुण बनाने के लिए अपराजिता जैसी मुहिम जरूरी हैं। हैदराबाद जैसी वारदात दोबारा समाज में न हो, इसके लिए पूरे समाज और देश को एक होकर ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज उठानी होगी। ऐसा करने वालों को समाज में जगह ही नहीं दी जानी चाहिए।

सामाजिक एकजुटता जरूरी
गृहणी सुमन चौहान का कहना है कि समाज जब तक आरोपियों के खिलाफ एक नहीं होगा, तब तक समाधान संभव नहीं है। पूरे समाज को ऐसे लोगों के खिलाफ एक होना पड़ेगा, तभी यह संभव है कि भविष्य में इस तरह की वारदातों पर रोक लगाई जा सकेगी।

होना चाहिए सख्त कानून का डर
महिला शिक्षक डॉ. कविता विश्वकर्मा ने कहा कि सबको मिलकर स्वस्थ समाज का निर्माण करना होगा। खराब मानसिकता के लोगों के खिलाफ जब तक समाज एक नहीं होगा और उन्हें सख्त कानून का डर नहीं होगा, तब तक इस तरह की वारदातों पर रोक नहीं लग सकेगी।
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बेटियों को बनाए सशक्त, बेटों की करें निगरानी
महिला शिक्षक सिंपल त्यागी ने कहा कि बेटियों को और अधिक सशक्त किया जाए और बेटों पर निगरानी बढ़ाई जाए। अगर किसी लड़के ने गलती की है तो परिवार और समाज को उसका समर्थन नहीं करना चाहिए।

सही गलत का ज्ञान कराना जरूरी
महिला शिक्षक राजेश कुमारी शर्मा ने कहा कि देश में सख्त से सख्त कानून बनना चाहिए। इसके अलावा किशोर अवस्था से ही बच्चों को सही और गलत का ज्ञान कराया जाना जरूरी है। इससे बच्चे मानसिक तौर पर स्वस्थ होंगे। 

सख्त कानून बनाकर ही मिलेगी निजात
महिला शिक्षक शिल्पी ने कहा कि इस तरह के मामलों के लिए सख्त कानून बनाया जाना जरूरी है। जब तक कानून सख्त नहीं होगा, इस तरह की वारदात सामने आती रहेगी। ऐसे प्रकरणों का तुरंत निपटारा कराया जाना चाहिए।

खुद शुरू करनी होगी लड़ाई
डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि  जिस तरह के प्रकरण सामने आ रहे हैं, ऐसे में महिलाओं को अपने हकों की लड़ाई खुद ही शुरू करनी होगी। महिलाएं एक हो, साथ ही अपने पास रहने वाली किशोरियों को सही गलत के विषय में बताएं। कानून और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दें।

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