मेरठ। गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल के प्राचार्य कर्मेंद्र सिंह ने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी महिलाओं की अहम भूमिका है। दरअसल, पारंपरिक रूप में हमारे घरों में पानी को एकत्रित करने के लिए मिट्टी के घड़ों के पानी सेवन किया जाता था। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए पूजन व हवन सामग्री में प्राकृतिक जड़ी-बूटियां का प्रयोग किया जाता था। यह सारे कार्य हमारे घर की स्त्रियों द्वारा किए जाते रहे हैं। स्त्री सृष्टि का सृजन करती हैं। वह प्रकृति के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती रही हैं।
आरजी पीजी कॉलेज में बुधवार को वसुधा इको क्लब के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी हुई। इसका विषय ‘पर्यावरणीय स्थिरता में महिलाओं की भूमिका’ रहा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य मनीषा अहलावत ने कहा कि महिलाओं का उत्पीड़न और पर्यावरण का ह्रास आपस में जुड़े हुए हैं। सिर्फ महिलाओं के प्रयास से ही नहीं बल्कि इस पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों का समर्थन भी पर्यावरणीय समस्याओं से मुक्ति दिला पाएगा। पर्यावरणीय दृष्टि से हम प्राकृतिक संसाधनों का दोहन ज्यादा कर रहे हैं। लोगों को इस बात के लिए जागरूक होने की जरूरत है।
कवि डॉ. ईश्वर चंद्र गंभीर सिंह ने महिलाओं की उपलब्धियों पर कविताएं सुनाईं। भूतपूर्व आईएएस ऑफिसर डॉ. प्रभात राय ने हर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को संदर्भित करते हुए पर्यावरण की सुरक्षा को युवाओं का परम कर्तव्य बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज प्राचार्य प्रो. निवेदिता मलिक ने किया। कार्यक्रम में प्रो. कल्पना चौधरी, पूनम लखनपाल, हर्षवर्धन राजवंशी बिट्टन, पुष्पेंद्र शर्मा, ब्रज भूषण गुप्ता, प्रेम कुमार शर्मा, जगमोहन शाकाल, सौरभ दिवाकर शर्मा, पूजा राजपूत, भावना यादव, रिषी कौशिक और रिषभ पाराशर मौजूद रहे।