शामली। जनपद में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं के भरोसे चल रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे है। साल में अब तक 395 महिलाओं ने नसबंदी कराकर परिवार नियोजन में भागेदारी निभाई है, जबकि चार पुरुष ही इसके भागीदार बने है। नसबंदी को लेकर पुरुष नसबंदी पखवाड़ा शुरू किया है, जिसमें पुरुषों को नसबंदी के लिए जागरूक किया जाएगा।
जनसंख्या नियंत्रण के लिए शासन - प्रशासन परिवार नियोजन पर जोर दे रहा है। परिवार नियोजन में पुरुषों की सहभागिता न के बराबर ही है। इस साल अप्रैल से अक्तूबर माह तक 395 महिलाओं ने और चार पुरुषों ने नसबंदी कराई है। इसके अलावा डिलीवरी के बाद 1122 महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी लगवाकर जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम में सहभागिता की है। परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी एसीएमओ डाक्टर सफल कुमार ने बताया कि नसबंदी के मामले में पिछड़ रहे पुरुषों में जागरूकता लाने के लिए बृहस्पतिवार से पुरुष नसबंदी पखवाड़ा शुरू किया गया है। इसके तहत 21 से 27 अक्तूबर तक आशाएं घर-घर जाकर परिवार नियोजन कार्यक्रम की जानकारी देंगी और नसबंदी के इच्छुक दंपती (टारगेट कपल) को चिह्नित करेंगी। इसके बाद 28 अक्तूबर से चार दिसंबर तक ब्लाक स्तर पर कैंप लगाकर नसबंदी आपरेशन कराए जाएंगे। साथ ही परिवार नियोजन के लिए अंतरा, छाया टेबलेट, कॉपर-टी आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
177 पुरुष और 1160 महिलाओं का लक्ष्य
जनपद में इस साल 177 पुरुष की और 1160 महिलाओं की नसबंदी का लक्ष्य दिया गया है। यह लक्ष्य पूरा करना विभाग के लिए आसान नहीं है। पिछले सालों में भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। पिछले साल 15 पुरुष और 530 महिलाओं द्वारा नसबंदी कराई गई थी।
महिलाओं को 1400 और पुरुष को 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि
शासन की तरफ से महिला को नसबंदी कराने पर 1400 रुपये और पुरुष को 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। डिलीवरी के बाद पीपीआईयूसीडी लगवाने पर महिला को 150 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। महिलाओं के मुकाबले प्रोत्साहन राशि अधिक होने के बाद भी पुरुष नसबंदी कराने में महिलाओं से बहुत पीछे है।
ये प्रमुख वजह आई सामने
- पुरुष प्रधान समाज में इस कार्य के लिए महिला को आगे करना।
- पुरुषों में नसबंदी के बाद शारीरिक कमजोरी आने की भ्रांति होना।
- पुरुषों में नसबंदी को लेकर जागरूकता का अभाव होना।
परिवार नियोजन के तहत नसबंदी कराने में महिलाएं आगे हैं, जबकि पुरुष की संख्या बहुत कम है। मुख्य वजह पुरुषों में कई तरह की भ्रांतियां होती है। भ्रांतियों को दूर करने और जागरूकता लाने के लिए पुरुष नसबंदी पखवाड़ा शुरू किया गया है। पुरुष की बिना चीरे टांके के एनएसवी नसबंदी की जाती है। नसबंदी के बाद तुरंत छुट्टी कर दी जाती है। - डाक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।