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Meerut News: भेड़िये ने आबादी में नहीं दी दस्तक फिर भी दहशत

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हस्तिनापुर। वन अधिकारियों का दावा है कि पांच जिलों में फैले हस्तिनापुर वन क्षेत्र में लगभग दो दशक से किसी भेड़िये ने आबादी क्षेत्र में दस्तक नहीं दी है। इसके बावजूद बहराइच में हुए हमले के बाद क्षेत्र के लोगों में भी डर बना है। वन अधिकारियों के पास हर रोज लगभग दस भ्रामक कॉल पहुंच रही हैं। भेडिया आने की सूचना वन अधिकारियों को दी जाती है और टीम मौके पर पहुंचती है लेकिन सूचना झूठी निकलती है। इसके चलते टीम ग्रामीणों को जागरूक कर और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की सलाह देती है।
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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पिछले कुछ दिनों से भेड़ियों का जो आतंक सामने आया है। उससे वन्य जंगलों के आसपास बसे गांवों के लोग दहशत में हैंं। जबकि वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। हस्तिनापुर वन अभ्यारण क्षेत्र मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, हापुड़ सहित कुल पांच जिलों के 2073 वर्ग किमी तक फैला हुआ है। लेकिन इस वन क्षेत्र के आसपास हाल फिलहाल ही नहीं दो दशक से भेड़िये के हमले की कोई घटना सामने नहीं आई है।

विकास की रफ्तार ने रोके भेड़ियों के कदम
हस्तिनापुर वन अभ्यारण क्षेत्र के गांव से बहराइच जिले के गांव की तुलना की जाए तो वह विकास में भी बहुत पीछे हैं। वहां पर आज भी कच्चे घर और बिना लाइट के घर मिलेंगे परंतु हस्तिनापुर वन क्षेत्र में कोई ऐसा गांव नहीं है। यहां पिछले दो दशक में तेजी से विकास हुआ। 24 घंटे वाहनों का आवागमन रहता है। ऐसे में भेड़िये आबादी की ओर आने से डरते हैं।
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पुराने वायरल वीडियो से घबराने की जरूरत नहीं
पिछले कई दिनों से भेड़ियों से जुड़े बहराइच और अन्य स्थानों के पुराने वीडियो किसी भी गांव या क्षेत्र का नाम लिखकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। ये वीडियो अफवाह फैलाने का काम कर रहे हैं। ऐसे वीडियो से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि सावधान रहने की जरूरत है। वन अधिकारी इन्हें वायरल करने वालों की पहचान का प्रयास कर रहे हैं। जिससे ऐसे लोगोें पर कार्रवाई की जा सके।


अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
हस्तिनापुर वन क्षेत्र के आसपास अभी तक भेड़िये के आबादी क्षेत्र में हमले की दो दशक में कोई घटना सामने नहीं आई है। ग्रामीण किसी भी फेेक वीडियो, भ्रामक सूचना या अफवाह पर ध्यान न दें। अफवाह फैलाने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।
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राजेश कुमार, जिला वन अधिकारी
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